आतिशी ने कहा कि लंबे समय से उत्तर प्रदेश और हरियाणा से शराब की तस्करी कर दिल्ली लाने का खेल चल रहा था और अब कैग की रिपोर्ट ने भी इस सच्चाई पर मुहर लगा दी है। उनके अनुसार, पुरानी एक्साइज नीति में दो स्तरों पर भ्रष्टाचार किया जाता था। पहला, सरकार को हर शराब की बोतल पर मिलने वाला राजस्व ठेकेदारों द्वारा कम दिखाया जाता था। जब सरकार एक्साइज ड्यूटी की गणना करती थी, तो शराब कारोबारी जानबूझकर 28% कम बोतलें दिखाते थे, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान होता था। दूसरा, कैग की रिपोर्ट ने यह भी उजागर किया कि जिन ठेकेदारों के पास लाइसेंस थे, वे अवैध तरीके से शराब की ब्लैक मार्केटिंग कर रहे थे। इससे सरकार के राजस्व में और भी ज्यादा कमी आई। आतिशी ने सवाल उठाया कि जिन ठेकेदारों को इस तरह के भ्रष्टाचार की छूट मिली हुई थी, वे किन राजनीतिक दलों से जुड़े हुए थे?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुरानी नीति के कारण उत्तर प्रदेश और हरियाणा से बड़े पैमाने पर शराब की तस्करी हो रही थी और यह सभी जानते हैं कि इन राज्यों में किसकी सरकार थी। इसके विपरीत, कैग की रिपोर्ट बताती है कि आम आदमी पार्टी की नई एक्साइज नीति ज्यादा पारदर्शी थी, जिसमें ब्लैक मार्केटिंग रोकने और सरकारी खजाने की आय बढ़ाने के प्रभावी प्रावधान थे। आतिशी ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब यही नीति पंजाब में लागू की गई, तो राज्य के एक्साइज राजस्व में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई।
वित्त वर्ष 2021-22 में पंजाब का एक्साइज राजस्व 6,158 करोड़ रुपये था।
नई एक्साइज नीति लागू होने के बाद यह बढ़कर 8,841 करोड़ रुपये हो गया।
2025 तक यह आंकड़ा 10,146 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
दिल्ली विधानसभा में आज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश की गई सीएजी (CAG) रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि पिछली सरकार के फैसलों और शराब नीति के कारण राष्ट्रीय राजधानी के खजाने को 2,002 करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान हुआ है।
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