ACB ने अप्रैल में दोनों नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उस समय मनीष सिसोदिया के पास शिक्षा और वित्त जैसे अहम विभाग थे, जबकि सत्येंद्र जैन स्वास्थ्य, बिजली, उद्योग, शहरी विकास और लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री थे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि क्लासरूम निर्माण कार्यों में लागत को कई गुना बढ़ाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
गौरतलब है कि मनीष सिसोदिया पहले से ही दिल्ली शराब नीति मामले में आरोपी हैं और इस मामले में वह 17 महीने जेल में बिता चुके हैं। वहीं, सत्येंद्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दो वर्षों तक हिरासत में रहे और जमानत मिली है।
अब इस नए मामले ने न केवल दोनों नेताओं की कानूनी चुनौतियों को बढ़ा दिया है, बल्कि आम आदमी पार्टी के लिए भी नई राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
आम आदमी पार्टी ने इस समन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई" बताया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। जैसे-जैसे समन की तारीखें नजदीक आ रही हैं, दिल्ली की राजनीति फिर गर्माने लगी है। अब देखना यह होगा कि ACB की आगे की जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या यह मामला आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के लिए नई कानूनी जटिलताएं लेकर आएगा।





