64 साल बाद गुजरात में होगा AICC अधिवेशन
यह अधिवेशन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह 64 वर्षों में पहली बार गुजरात में हो रहा है। कांग्रेस पार्टी की 140 साल की यात्रा में यह महज छठा मौका है जब ऐसा कोई अधिवेशन गुजरात की धरती पर आयोजित हो रहा है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश के मुताबिक, यह बैठक कांग्रेस की ऐतिहासिक विरासत, संगठनात्मक पुनर्गठन और जवाबदेही जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित होगी। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी रहेगी। अधिवेशन की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे। इसके अलावा कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, कार्य समिति सदस्य, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य और वरिष्ठ पदाधिकारी शिरकत करेंगे।
अधिवेशन का एजेंडा क्या होगा?
अधिवेशन का उद्देश्य स्पष्ट है — संगठन को नए सिरे से खड़ा करना, जवाबदेही तय करना और आगामी चुनावों की तैयारी करना। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जिला कांग्रेस समितियों (DCC) को सशक्त बनाने, संगठन विस्तार को तेज करने और जिम्मेदार पदाधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे निर्णय लिए जाएंगे।
बैठक 9 अप्रैल को अहमदाबाद में होगी, जबकि 8 अप्रैल को सरदार पटेल मेमोरियल में विस्तारित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक साबरमती तट पर कोचरब और साबरमती आश्रम के बीच आयोजित की जाएगी।
गुजरात में कांग्रेस के अब तक के अधिवेशन
1902 – अहमदाबाद, अध्यक्ष: सुरेंद्र नाथ बनर्जी
1907 – सूरत, अध्यक्ष: रास बिहारी घोष
1921 – अध्यक्ष: हकीम अजमल खान
1938 – हरिपुरा, अध्यक्ष: नेताजी सुभाष चंद्र बोस
1961 – भावनगर, अध्यक्ष: नीलम संजीव रेड्डी
2025 – अहमदाबाद, अध्यक्षता: मल्लिकार्जुन खड़गे। गांधी और पटेल की भूमि पर कांग्रेस का यह अधिवेशन एक सशक्त राजनीतिक संदेश देने का प्रयास भी है। पार्टी नेतृत्व इस आयोजन के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को उनके ही गढ़ में सीधी चुनौती देना चाहता है। कांग्रेस यह जताना चाहती है कि वह 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर रही है।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद कांग्रेस महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली के विधानसभा चुनावों में पिछड़ गई। ऐसे में यह अधिवेशन पार्टी के लिए आत्ममंथन और पुनर्गठन का बड़ा अवसर है।
बिहार में होने वाले आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस की नजरें एक बार फिर विपक्षी एकता और गठबंधन की राजनीति पर टिकी हैं। इसके अलावा, पार्टी को 2026 में केरल, असम और तमिलनाडु जैसे अहम राज्यों में भी चुनौतीपूर्ण मुकाबले का सामना करना है।
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