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संगठन में बड़े बदलाव तैयारी में कांग्रेस, दिल्ली में बुलाई गई 700 जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों की बैठक, गुजरात से शुरुआत

कांग्रेस पार्टी, जो पिछले कई वर्षों से एक के बाद एक कई चुनावों में हार का सामना करती आ रही है अब अपने संगठन को मजबूत करने और पुनर्जनन के लिए एक महत्वपूर्ण |

संगठन में बड़े बदलाव तैयारी में कांग्रेस, दिल्ली में बुलाई गई 700 जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों की बैठक, गुजरात से शुरुआत
फोटो: संगठन में बड़े बदलाव तैयारी में कांग्रेस, दिल्ली में बुलाई गई 700 जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों की बैठक, गुजरात से शुरुआत
कांग्रेस पार्टी, जो पिछले कई वर्षों से एक के बाद एक कई चुनावों में हार का सामना करती आ रही है, अब अपने संगठन को मजबूत करने और पुनर्जनन के लिए एक महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में जुट गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने अपनी जिला कांग्रेस कमेटियों (DCC) को संगठन का मुख्य आधार और केंद्र बिंदु बनाने की दिशा में एक ठोस और सुनियोजित कदम उठाया है। इसके तहत AICC ने देश भर के लगभग 700 जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों के लिए एक विस्तृत और तीन दिवसीय बैठक का आयोजन करने का निर्णय लिया है। यह बैठक 27-28 मार्च और 3 अप्रैल को नई दिल्ली में तीन अलग-अलग बैचों में आयोजित की जाएगी। इस बैठक का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य एक नई और प्रभावी संगठनात्मक रूपरेखा को तैयार करना और उसे लागू करना है, जिसके जरिए जमीनी स्तर पर पार्टी की मशीनरी को मजबूत किया जा सके और कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकी जा सके।

 इस पहल का पायलट प्रोजेक्ट सबसे पहले गुजरात राज्य में शुरू करने की योजना बनाई गई है। यह बैठक, जो पूरे 16 साल बाद होने जा रही है, कांग्रेस के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी पहल का पायलट प्रोजेक्ट गुजरात में लागू किया जाएगा, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। इस तीन दिवसीय बैठक में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों को उम्मीदवारों के चयन में अहम और निर्णायक भूमिका देने के साथ-साथ संगठन को और अधिक सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। यह निर्णय AICC के महासचिवों और प्रभारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेता शामिल थे। इसके अलावा, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कुछ चुनिंदा नेताओं के एक अनौपचारिक समूह द्वारा तैयार की गई संगठनात्मक मजबूती की विस्तृत रूपरेखा पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, "यह बैठक हमारी जिला इकाइयों को सशक्त करने, संगठन को एक नई और प्रगतिशील दिशा देने के लिए एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम है। हमारा प्रमुख लक्ष्य जमीनी स्तर पर पार्टी की ताकत को बढ़ाना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है।" पार्टी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि इस बैठक के जरिए कांग्रेस अपनी रणनीति को और अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी बनाना चाहती है, खासकर उन राज्यों में जहां निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। गुजरात में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को आधार बनाकर इसे देश के अन्य राज्यों में भी धीरे-धीरे लागू करने की योजना तैयार की जा रही है। यह कदम कांग्रेस के लिए अपने संगठनात्मक ढांचे में आमूलचूल बदलाव लाने, जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करने का एक सुनहरा अवसर माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस बैठक के परिणाम और निष्कर्ष पार्टी की भविष्य की रणनीति और दिशा पर गहरा और दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।

कांग्रेस का गुजरात पर विशेष फोकस क्यों?


गुजरात पिछले तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का एक अभेद्य और मजबूत गढ़ रहा है, और यह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य भी है। यदि कांग्रेस गुजरात में कोई बड़ी सफलता हासिल करने में कामयाब हो जाती है, तो यह न केवल बीजेपी की अजेय छवि को गंभीर चुनौती दे सकता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा, गुजरात का ऐतिहासिक महत्व भी इस फैसले में अहम है, क्योंकि यह महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की जन्मभूमि है, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अमिट छाप छोड़ी और कांग्रेस की नींव को अटूट बनाया। गुजरात में अपनी साख को पुनर्जनन करना कांग्रेस के लिए अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने और अपने ऐतिहासिक गौरव को फिर से स्थापित करने का एक प्रतीकात्मक और रणनीतिक कदम हो सकता है। गुजरात में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। खासकर ग्रामीण इलाकों, आदिवासी क्षेत्रों और कुछ शहरी मतदाताओं के बीच पार्टी की मौजूदगी बनी हुई है। 

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 77 सीटें जीतकर बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन 2022 के चुनाव में उसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा और वह केवल 17 सीटों तक सिमट गई। पार्टी का मानना है कि यदि वह अपने वोट प्रतिशत को 5-10% तक बढ़ाने में सफल हो जाती है, तो सत्ता में वापसी की संभावना काफी हद तक बन सकती है। हालांकि, गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से संगठनात्मक रूप से कमजोर रही है, जिसके चलते नेताओं का पलायन और आंतरिक कलह जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। अब पार्टी गुजरात को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए एक प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है, ताकि जमीनी स्तर पर अपनी मशीनरी को मजबूत किया जा सके।

 हाल की AICC बैठक और राहुल गांधी के गुजरात दौरे इस दिशा में संकेत देते हैं। 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अभी से अपनी तैयारियों को तेज करना चाहती है। हाल ही में हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में बनासकांठा सीट पर मिली जीत ने पार्टी के हौसले को बढ़ाया है और अब वह इस सफलता को आगे ले जाने की उम्मीद कर रही है। गुजरात में संगठन को मजबूत करने की यह रणनीति न केवल राज्य में पार्टी की स्थिति को बेहतर कर सकती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके प्रभाव को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।

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