ईडी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में रायपुर स्थित कवासी लखमा का एक आवासीय घर, उनके बेटे हरीश लखमा का सुकमा स्थित घर और उनकी बेटी की कई अचल संपत्तियां शामिल हैं। इन संपत्तियों की कुल कीमत 6.15 करोड़ रुपये आंकी गई है। संपत्ति कुर्की की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।
यह पहला मामला है जब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किसी राजनीतिक दल की संपत्ति जब्त की है।
रायपुर में कांग्रेस प्रवक्ता ने ईडी की इस कार्रवाई को भाजपा की “राजनीतिक साजिश” बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सुकमा कार्यालय के निर्माण में खर्च हुए "एक-एक रुपये" का हिसाब पेश करेगी। प्रवक्ता ने दावा किया कि यह पूरी कार्रवाई बदले की भावना से की जा रही है। कवासी लखमा छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं और कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। भूपेश बघेल सरकार में वे आबकारी मंत्री भी रहे। उनके बेटे हरीश लखमा सुकमा जिले में पंचायत अध्यक्ष हैं। ईडी ने दिसंबर 2024 में रायपुर, सुकमा और धमतरी में उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी। जनवरी 2025 में कवासी लखमा को गिरफ्तार किया गया, और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी का दावा है कि कवासी लखमा को अवैध शराब कारोबार से हर महीने करीब 2 करोड़ रुपये मिलते थे। इस तरह उन्होंने तीन वर्षों में लगभग 72 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। जांच के दौरान ईडी ने कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं, जिनसे यह सामने आया कि रायपुर, सुकमा और अन्य स्थानों पर जिन संपत्तियों का निर्माण हुआ, उसमें नकदी का उपयोग किया गया।
एजेंसी के मुताबिक, रायपुर स्थित घर में 2.24 करोड़ रुपये की अवैध नकदी का निवेश हुआ।
हरीश लखमा के सुकमा स्थित घर के निर्माण में 1.40 करोड़ रुपये खर्च हुए।
सुकमा में कांग्रेस जिला कार्यालय के निर्माण में 68 लाख रुपये की नकदी का उपयोग हुआ।





