अदालत ने यह भी माना कि अगर केस जारी रखा गया तो आरोपी के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं होने के कारण, मामला साबित होने की संभावना बहुत कम है। इससे पहले, आरोपी ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उसने यूट्यूब पर एक टिप्पणी की थी, जिसे लेकर उसे साजिश का शिकार बनाया गया और उन पर ममता बनर्जी और कुछ अन्य नेताओं का मजाक उड़ाने का आरोप लगा दिया गया था। आरोपी ने अपनी टिप्पणी को लेकर कहा कि उसकी कोई मंशा नहीं थी, बल्कि वह सिर्फ एक सामान्य बात कर रहे थे और इसे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए था।
कोर्ट ने कहा कि जब इस मामले में कोई ठोस प्रमाण नहीं है, तो इसे आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है और मामले को खत्म किया जाना चाहिए।
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