नए आयकर कानून में कई महत्वपूर्ण सुधारों की उम्मीद जताई जा रही है। इसका उद्देश्य कानून को आम लोगों के लिए सरल और समझने योग्य बनाना है, ताकि वे आयकर प्रणाली में उत्पन्न होने वाली जटिलताओं को आसानी से समझ सकें। इसके अलावा, कानून में कुछ अप्रचलित और अनावश्यक प्रावधानों को हटाया जाएगा, जो लंबे समय से प्रभावहीन हो चुके हैं। इसके साथ ही, टैक्स विवादों को कम करने के लिए उपाय किए जाएंगे, और टैक्सपेयर्स के लिए अनुपालन को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि देश के 65 प्रतिशत से अधिक करदाता पहले से ही न्यू टैक्स रिजीम को अपना चुके हैं। इसका मतलब है कि अब हर 3 में से 2 लोग न्यू टैक्स रिजीम के तहत आयकर फाइल कर रहे हैं। यह बदलाव पिछले एक साल में विशेष रूप से देखा गया, जब बजट 2020 में न्यू टैक्स रिजीम को लागू किया गया था, और शुरुआत में लोग इसे अपनाने से हिचकिचा रहे थे। हालांकि, अब यह रिजीम अधिक लोकप्रिय हो गया है।
भारत में वर्तमान में दो प्रकार की आयकर व्यवस्था हैं – पुरानी टैक्स प्रणाली (Old Tax Regime) और नई टैक्स प्रणाली (New Tax Regime)। जहां पुरानी प्रणाली में करदाताओं को विभिन्न छूट और कटौतियां मिलती हैं, वहीं नई प्रणाली में ऐसे विकल्प कम होते हैं, लेकिन कर दरें थोड़ी कम की गई हैं। नई टैक्स प्रणाली में ₹0 से ₹3 लाख तक की आय पर कोई कर नहीं लगता, ₹3 लाख से ₹7 लाख तक की आय पर 5%, ₹7 लाख से ₹10 लाख तक की आय पर 10%, ₹10 लाख से ₹12 लाख तक पर 15%, ₹12 लाख से ₹15 लाख तक पर 20%, और ₹15 लाख से अधिक की आय पर 30% कर लगता है। वहीं, पुरानी प्रणाली में आयकर स्लैब अलग हैं, और इसमें करदाता को कई छूट और कटौतियां मिलती हैं।
अब, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार इस नए विधेयक के माध्यम से पुरानी टैक्स प्रणाली को समाप्त करने पर विचार कर सकती है, और केवल नई प्रणाली को लागू कर सकती है। इससे करदाताओं के लिए एक सुसंगत और सरल कराधान व्यवस्था का निर्माण हो सकता है।
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