गौरतलब है कि हाल ही में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘छावा’ के बाद औरंगजेब का किरदार देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बहस के बीच बिहार में भी सियासी घमासान छिड़ गया। सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के एमएलसी खालिद अनवर ने अपने बयान में औरंगजेब को 'अच्छा शासक' करार दिया और कहा कि एक लॉबी उन्हें गलत तरीके से ‘जालिम’ साबित करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने सपा नेता अबू आजमी के बयान का समर्थन करते हुए कहा,
“यह एक ऐतिहासिक और शैक्षणिक बहस है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन इसे राजनीति में घसीटने की जरूरत नहीं है। कई बड़े इतिहासकारों ने भी औरंगजेब को एक अच्छा शासक बताया है।" जेडीयू नेता के इस बयान पर बीजेपी ने जोरदार हमला बोला। मंत्री नीरज बबलू ने कहा,
"जो लोग औरंगजेब की तारीफ कर रहे हैं, उन्हें इतिहास का अध्ययन करना चाहिए। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।"
इस विवाद के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज एक ऐतिहासिक चर्चा है या चुनावी रणनीति का हिस्सा? बिहार में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और ऐसे में धार्मिक व ऐतिहासिक मुद्दों पर बयानबाजी चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकती है।





