प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों से नीतीश कुमार मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके हैं और अब वे खुद राज्य की सरकार चलाने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बजाय, भाजपा ने उन्हें राज्य के 13 करोड़ लोगों पर जबरदस्ती शासन करने के लिए बैठा रखा है।
प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि बिहार में अब जन सुराज की ज़रूरत है, और नीतीश कुमार को सिर्फ एक प्रतीक बनाकर रखा गया है, जबकि असली शक्ति तो दिल्ली और कुछ अधिकारियों के हाथों में है। इसके अलावा, उन्होंने वक्फ बिल को लेकर भी अपनी चिंताएँ जाहिर कीं। उनका कहना था कि यह बिल बिना प्रभावित समुदाय को विश्वास में लिए ही लाया जा रहा है, और जन सुराज पार्टी इसका विरोध करती है। उन्होंने वक्फ बिल को वापस लेने की मांग की और कहा कि अगर यह बिल पारित होता है, तो इसके लिए भाजपा से अधिक नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू के सांसद जिम्मेदार होंगे।
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि अगर जदयू के सांसद वक्फ के खिलाफ वोट करते हैं, तो यह कानून नहीं बन पाएगा, लेकिन अगर वे इसके खिलाफ वोट नहीं करते, तो फिर उनका गांधी और लोहिया के अनुयायी होने का दावा गलत होगा। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को मुस्लिम समाज माफ नहीं करेगा, क्योंकि वह इस बिल को लेकर उनके विश्वासों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
इसके अलावा, प्रशांत किशोर किशनगंज के अंजुमन इस्लामिया ईद मिलन कार्यक्रम में शामिल हुए और वहां मदरसा अमजदिया ईदगाह में चादरपोशी की। उन्होंने ईद पर समाज में शांति, सद्भाव, एकता और लोगों के जीवन में खुशहाली की दुआ मांगी। यह आयोजन उनकी राजनीति के हिसाब से महत्वपूर्ण था, क्योंकि उन्होंने इस कार्यक्रम में अपनी बातें रखने के साथ ही बिहार की वर्तमान सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा।
इस कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने बिहार में सरकार के कमजोर होते प्रभाव को रेखांकित किया और कहा कि राज्य में अब बदलाव की जरूरत है। उनका कहना था कि नीतीश कुमार का हाल अब वैसा ही हो गया है, जैसा किसी थके हुए नेता का होता है, जो खुद से किसी भी दिशा में कुछ नहीं कर सकता।
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