डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि इस मामले में सरकार पूरी तरह से कार्रवाई कर रही है और इस माफिया के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि कानूनी प्रक्रियाओं और दांव-पेंचों के कारण कचरा प्रबंधन नीति को पूरी तरह से लागू करने में देरी हो रही है। उनका कहना था कि कचरा निपटान की प्रक्रिया को चार पैकेजों में बांटने और कचरे को बेंगलुरू शहर से 50 किलोमीटर दूर स्थित स्थानों पर ले जाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन कानूनी अड़चनों की वजह से यह योजना फिलहाल पूरी तरह से ठप्प पड़ी हुई है। इस दौरान शिवकुमार ने यह भी बताया कि इस योजना में शामिल वाहन पिछले तीन दिनों से शहर से बाहर महादेवपुरा में फंसे हुए हैं, जिससे कचरा निपटान का कार्य प्रभावित हो रहा है।
शिवकुमार ने बेंगलुरू के सभी विधायकों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ये विधायक कचरा संकट को लेकर सरकार को ब्लैकमेल कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने 800 करोड़ रुपये की राशि की मांग की है। हालांकि, उन्होंने किसी विधायक का नाम लेने से इनकार करते हुए कहा, "मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन यह सच्चाई है कि ये सभी पार्टी के विधायक हैं।" डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि ये विधायकों का यह रवैया सरकार के कामकाज को प्रभावित कर रहा है और इस तरह के दबाव को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा।
इस पूरे विवाद ने कर्नाटक की सरकार और बेंगलुरू के विधायकों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। कचरे के बढ़ते संकट के बीच, इस मुद्दे का राजनीतिकरण हो रहा है, और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, बेंगलुरू के नागरिकों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बन चुका है, क्योंकि कचरा निपटान की उचित व्यवस्था न होने के कारण शहर की साफ-सफाई में लगातार समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
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