आम आदमी पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से बाबा साहब भीमराव आंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें हटा दी गई हैं, लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया को दफ्तर में बुलाकर यह स्पष्ट किया कि दोनों महापुरुषों की तस्वीरें अभी भी वहां लगी हुई हैं, हालांकि उनकी स्थिति में बदलाव किया गया है। अब मुख्यमंत्री की कुर्सी के पीछे महात्मा गांधी, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की तस्वीरें लगी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि तस्वीरों की स्थान परिवर्तन किया गया है, लेकिन कोई तस्वीर हटी नहीं है। फिर भी आम आदमी पार्टी इस बदलाव को लेकर आक्रोशित है और इस मुद्दे पर उनका विरोध जारी है।
जैसे ही एलजी वीके सक्सेना अभिभाषण के लिए खड़े हुए, आम आदमी पार्टी के विधायकों ने "जय भीम, अंबेडकर का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान" जैसे नारे लगाते हुए सदन में हंगामा शुरू कर दिया। कुछ देर तक एलजी भी चुपचाप इस हंगामे को देखते रहे, लेकिन नारेबाजी के बीच ही उन्होंने अपना अभिभाषण जारी रखा।
इस दौरान स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने बारी-बारी से आप विधायकों को दिनभर के लिए निष्कासित कर दिया। इनमें अनिल झा, सोम दत्त, विशेष रवि, आतिशी, और गोपाल राय समेत कई विधायक शामिल थे। इसके बाद अन्य विधायकों ने खुद ही उठकर सदन से बाहर जाने का निर्णय लिया।
सदन से बाहर निकलने के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी ने बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की तस्वीर को हटाकर उसकी जगह नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगा दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय में जहां पहले आंबेडकर की तस्वीर लगी थी, वहां अब नरेंद्र मोदी की तस्वीर है। यह सिर्फ मुख्यमंत्री कार्यालय तक सीमित नहीं है, दिल्ली सरकार के मंत्रियों के कार्यालयों में भी यही किया गया है।"
आतिशी ने सवाल किया कि "क्या भाजपा को लगता है कि नरेंद्र मोदी बाबा साहब आंबेडकर से बड़े हैं? क्या भाजपा का अहंकार अब इस हद तक बढ़ चुका है कि वे यह भी नहीं सोचते कि यह देश के महान नेताओं का अपमान हो सकता है?"
आतिशी ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इस विरोध को जारी रखेगी, जब तक उनकी तस्वीरें वापस नहीं लग जातीं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पार्टी का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक आंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें मुख्यमंत्री कार्यालय और दिल्ली सरकार के अन्य मंत्रियों के कार्यालयों में फिर से स्थापित नहीं की जातीं।
इस हंगामे ने विधानसभा में पूरी तरह से राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है और यह विवाद अब दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
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