रिपोर्ट में कहा गया है कि विमान ने सभी अनिवार्य मेंटेनेंस प्रोटोकॉल का पालन किया था और टेकऑफ से पहले ईंधन की गुणवत्ता भी पूरी तरह संतोषजनक पाई गई।
विल्सन ने आगे बताया कि उड़ान भरने से पहले पायलटों की मेडिकल और ब्रेथलाइज़र जांच भी की गई थी, जिसमें कोई असमान्यता नहीं मिली। इसका मतलब यह है कि न तो मानव त्रुटि और न ही यांत्रिक खामी इस भयावह हादसे की सीधी वजह बनी।
हालांकि, जांच रिपोर्ट में एक गंभीर तकनीकी चूक की ओर इशारा किया गया है।
अहमदाबाद विमान हादसे की रिपोर्ट में क्या?
रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के दोनों इंजनों में फ्यूल सप्लाई को नियंत्रित करने वाले स्विच टेकऑफ के तुरंत बाद किसी तकनीकी कारणवश बंद हो गए थे। इससे दोनों इंजन अचानक बंद हो गए, जिसके चलते पायलटों के पास विमान को नियंत्रित करने के लिए बहुत ही सीमित समय रह गया। एक इंजन को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की गई, और उसमें कुछ हद तक रिकवरी भी देखी गई, लेकिन दूसरा इंजन पूरी तरह फेल हो गया।
भारतीय समयानुसार दोपहर 1:38 बजे जब विमान ने उड़ान भरी, तो महज 26 सेकंड के भीतर 08:09:05 बजे पायलट द्वारा 'MAYDAY... MAYDAY... MAYDAY...' संदेश रेडियो पर भेजा गया। इसके कुछ ही क्षण बाद विमान एयरपोर्ट की सीमा से बाहर जाकर एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि विमान का मलबा आसपास की इमारतों पर जा गिरा, जिससे कई स्थानीय नागरिक भी हादसे का शिकार हो गए।
इस हादसे में कुल 242 लोग सवार थे, जिनमें 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर शामिल थे। चमत्कारिक रूप से एक यात्री की जान बच पाई, लेकिन बाकी सभी 241 लोग और आसपास की इमारतों में मौजूद 19 अन्य नागरिक भी मारे गए। कुल मिलाकर इस हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। फिलहाल एएआईबी ने हादसे के कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच जारी रखी है। दूसरी ओर, एअर इंडिया ने जांच में पूरी पारदर्शिता बरतने और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है।
यह हादसा न सिर्फ भारत के एविएशन इतिहास का एक काला अध्याय बन गया है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए तकनीकी ऑडिट और सेफ्टी प्रोटोकॉल को और कितना मजबूत करने की ज़रूरत है।





