वीडियो में ट्रंप यह कहते नजर आते हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान से कहा कि अगर वे युद्ध नहीं रोकेंगे तो अमेरिका उनके साथ व्यापार नहीं करेगा। अगर वे युद्ध रोकते हैं तो व्यापार जारी रहेगा। संजय सिंह ने इस वीडियो के हवाले से प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा कि क्या भारत ने व्यापार के बदले अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भारत का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का अपमान है। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री एक लीडर हैं या डीलर।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं कि क्या भारत अपनी विदेश नीति में किसी विदेशी शक्ति के दबाव में काम कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि अगर ट्रंप के दावे सही हैं तो यह भारत की संप्रभुता पर सीधा सवाल है और इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
वहीं, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पूरी तरह राष्ट्रहित में आधारित है और वह किसी भी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेते। भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट कर दिया है कि भारत की नीति अब निर्णायक है और आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
यह मामला अब केवल कूटनीति और रणनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद में भी गूंज सकता है और सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की जा सकती है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रधानमंत्री कार्यालय या विदेश मंत्रालय इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगा या नहीं।





