तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि नीतीश कुमार पिछले 20 सालों से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर काबिज हैं, लेकिन अपराध को नियंत्रित करने और राज्य को सुशासन देने में वे बुरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। एनसीआरबी के 20 सालों के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि उनके कार्यकाल में 60,000 हत्याएं और 25,000 बलात्कार जैसी जघन्य घटनाएं हुईं, जबकि गृह मंत्रालय का जिम्मा भी उनके ही पास रहा है। उनके शासनकाल में पुलिसकर्मियों की हत्या और मारपीट की घटनाएं अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं। उन्होंने हाल की चौंकाने वाली घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि महज तीन दिनों के भीतर कई हत्याओं को अंजाम दिया गया। एक पुलिस अधीक्षक (एसपी) के आवास के ठीक सामने ज्वेलरी दुकान में दिनदहाड़े डकैती की वारदात हुई और कई जिलों में पुलिस पर जानलेवा हमले किए गए। उन्होंने तंज कसा कि क्या अब नीतीश कुमार पिछले 15 सालों का हवाला देकर लालू प्रसाद यादव पर ही सारा ठीकरा फोड़ने की कोशिश करेंगे? उन्होंने मुख्यमंत्री के गृह जिले में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना का उल्लेख किया, जहां एक महिला के पैरों में कील ठोककर उसकी बर्बर हत्या कर दी गई, लेकिन इस जघन्य अपराध पर भी मुख्यमंत्री की रहस्यमयी खामोशी बरकरार है।
इससे पहले, विधान परिषद परिसर में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि होली के पर्व के दौरान 22 लोगों की हत्या का सिलसिला बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर नीतीश कुमार इस पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस "जंगलराज" की वे बार-बार आलोचना करते थे, उस दौर में इतने सिपाहियों और दारोगाओं की हत्या की घटनाएं कभी सामने नहीं आईं, लेकिन अब उनके तथाकथित "मंगलराज" में यह सब आम बात हो गई है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि बेटियों के साथ बलात्कार के बाद उनकी निर्मम हत्या की जा रही है और राज्य में अराजकता का माहौल व्याप्त हो गया है।
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