मंत्रालय करे तत्काल बैठक
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का पालन न करने से दिल्ली में कहीं स्वास्थ्य आपातकाल की जरुरत न पड़ जाए। 26 जुलाई के इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की थी। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिए थे कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय इस समस्या का हल निकालने के लिए संबंधित अधिकारियों, दिल्ली नगर निगम के आयुक्त और अन्य अधिकारियों के साथ तत्काल बैठक करे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखने वाली अपराजिता सिंह द्वारा पेश दलील पर सहमति जताई। अपराजिता के अनुसार दिल्ली में अगर ऐसे ही कूड़ा बढ़ता गया तो, एक दिन स्वास्थ्य आपातकाल लगने की जरुरत पड़ेगी। इसके अलावा एमसीडी की कचरे को प्रोसेस करने की कुल क्षमता महज 8,073 मीट्रिक टन है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इस का मतलब दिल्ली में हर दिन बिना प्रोसेस किया हुआ करीब 3,000 मीट्रिक टन कचरा जमा हो रहा है। कोर्ट ने आशंका जताई है कि यह आंकड़ा हर गुजरते दिन के साथ धीरे-धीरे और बढ़ सकता है। जिससे एक गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
अपराजिता ने कोर्ट को स्वच्छ भारत मिशन के हलफनामे की ओर भी ध्यान दिलाया। इस हलफनामे के अनुसार, 10 जुलाई 2024 को एमसीडी ने दिल्ली सरकार से कचरा साफ करने के लिए अधिक धन खर्च की अनुमति मांगी थी। ताकि, पांच करोड़ रूपए से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी देने की अनुमति मिल सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार इस प्रस्ताव की तुरंत समीक्षा करें और तीन सप्ताह के भीतर इस पर कोई फैसला ले।
फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी कचरे की समस्या
सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा भी कचरा प्रबंधन से जूझ रहे हैं। गुरुग्राम में हर दिन 1,200 मीट्रिक टन कचरा पैदा हो रहा है, लेकिन वहां प्लांट केवल 254 मीट्रिक टन ही प्रोसेस कर पा रहे हैं। फरीदाबाद में भी हर दिन 1,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसकी प्रोसेसिंग क्षमता करीब 410 मीट्रिक टन है।





