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Kerala UDF Government की नई शराब नीति पर बवाल, टैक्स कटौती से बढ़ा विवाद

Kerala UDF Government के कम अल्कोहल वाली शराब पर टैक्स घटाने के फैसले से विवाद बढ़ गया है। विपक्ष, सहयोगी दल और धार्मिक संगठन सरकार को घेर रहे हैं।

Kerala UDF Government की नई शराब नीति पर बवाल, टैक्स कटौती से बढ़ा विवाद
फोटो: Kerala UDF Government, Low Alcohol Beverages
Kerala UDF Government: केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली United Democratic Front (UDF) सरकार सत्ता संभालने के महज एक महीने बाद ही अपनी शराब नीति को लेकर राजनीतिक विवादों में घिर गई है। मुख्यमंत्री V.D. Satheesan द्वारा कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर बिक्री कर (Sales Tax) कम करने की घोषणा ने विपक्ष के साथ-साथ सरकार के सहयोगी दलों और सामाजिक-धार्मिक संगठनों को भी नाराज कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह कोई नई नीति नहीं बल्कि पहले से लागू व्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला कदम है, लेकिन विरोधी इसे शराब को बढ़ावा देने वाली नीति बता रहे हैं।

Kerala UDF Government: संशोधित बजट में टैक्स ढांचे में बदलाव 

Low Alcohol Beverages: वित्त विभाग का जिम्मा भी संभाल रहे मुख्यमंत्री V.D. Satheesan ने 2026-27 के संशोधित बजट में शराब पर लगने वाले सेल्स टैक्स के ढांचे में बदलाव का ऐलान किया। नए प्रावधानों के अनुसार 20 प्रतिशत तक अल्कोहल वाले उत्पादों को 'कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थ' की श्रेणी में रखा गया है।

सरकार ने तय किया है कि 0.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक अल्कोहल वाले उत्पादों पर 120 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगाया जाएगा, जबकि 10 प्रतिशत से अधिक और 20 प्रतिशत तक अल्कोहल वाले उत्पादों पर 175 प्रतिशत टैक्स लागू होगा। इसके विपरीत राज्य में बिकने वाली अधिकांश भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL), जिसमें व्हिस्की, रम और ब्रांडी शामिल हैं, लगभग 42 प्रतिशत अल्कोहल वाली होती है और उस पर पहले की तरह 251 प्रतिशत टैक्स लागू रहेगा।

v/v का क्या मतलब है? 

बजट दस्तावेजों में अल्कोहल की मात्रा को v/v यानी 'Volume by Volume' के आधार पर मापा गया है। इसका अर्थ है कि किसी पेय पदार्थ में कुल मात्रा के मुकाबले शुद्ध अल्कोहल कितना है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पेय में 10 प्रतिशत v/v अल्कोहल है तो 100 मिलीलीटर पेय में 10 मिलीलीटर शुद्ध अल्कोहल मौजूद होगा।

सरकार ने क्यों किया टैक्स में बदलाव? 

सरकार का दावा है कि टैक्स में यह संशोधन किसी नई शराब नीति का हिस्सा नहीं है। उसके अनुसार पिछली Left Democratic Front (LDF) सरकार ने वर्ष 2022-23 की आबकारी नीति में 0.5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक अल्कोहल वाले उत्पादों को 'कम अल्कोहल वाले पेय' के रूप में वर्गीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसे बाद में Kerala UDF Government के समय की नीतिगत चर्चाओं से भी जोड़ा जाता रहा।

उस समय इन उत्पादों के उत्पादन और बिक्री के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया गया था ताकि स्थानीय फलों, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों से बने पेय पदार्थों को भी इस श्रेणी में शामिल किया जा सके। हालांकि उस दौरान इनके लिए अलग टैक्स संरचना निर्धारित नहीं की गई थी। मौजूदा सरकार का कहना है कि अब उसी अधूरे ढांचे को पूरा करते हुए अलग टैक्स दरें तय की गई हैं।

सहयोगी दलों के भीतर भी बढ़ी नाराजगी

Satheesan Opposition Statement: सरकार के इस फैसले पर सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि UDF के अंदर भी असहमति सामने आई है। आबकारी मंत्री M. Liju ने साफ कहा कि टैक्स दर तय करना सरकार का प्रशासनिक फैसला है, लेकिन राज्य में ऐसे कम अल्कोहल वाले उत्पादों की बिक्री होनी चाहिए या नहीं, इस विषय पर गठबंधन स्तर पर अभी तक कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई है।

इस बीच केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के पूर्व अध्यक्ष V.M. Sudheeran ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस फैसले पर आपत्ति जताई है। शराबबंदी के समर्थक माने जाने वाले सुधीरन का कहना है कि टैक्स में राहत देकर सरकार अपने ही चुनावी वादों से पीछे हटती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार कांग्रेस ने शराब और नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने का वादा किया था, जबकि यह फैसला उसके विपरीत संदेश देता है।

IUML और चर्च संगठनों ने भी जताई चिंता

UDF की प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने भी इस फैसले पर चिंता व्यक्त की है। पार्टी प्रमुख Panakkad Sadiq Ali Shihab Thangal ने अपने लेख के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि टैक्स कटौती को लेकर उठ रही चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और जल्द समाधान निकाला जाए, जबकि इस मुद्दे को लेकर Kerala UDF Government के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है।

उधर, चर्च से जुड़े कई संगठनों ने भी सरकार के कदम का विरोध किया है। केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल की Temperance Commission की राज्य समिति ने इसे राजस्व बढ़ाने की कोशिश बताते हुए आशंका जताई कि इससे युवाओं में शराब की खपत बढ़ सकती है। समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे इस फैसले के खिलाफ आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। चर्च नेताओं ने यह तर्क भी खारिज किया कि कम अल्कोहल वाले पेय सस्ते होने से युवा अधिक खतरनाक नशीले पदार्थों से दूर रहेंगे।

विपक्ष ने लगाए निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के आरोप

इस मुद्दे पर विपक्षी CPI(M) ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का दावा है कि टैक्स में कटौती का उद्देश्य एक निजी शराब कंपनी को लाभ पहुंचाना है। पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने विधानसभा में कहा कि कर्नाटक की एक शराब कंपनी ने पहले भी कम टैक्स की मांग की थी और अब सरकार के फैसले से उसे बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता है।

पूर्व आबकारी मंत्री M.B. Rajesh ने भी मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। हालांकि सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह निर्णय केवल टैक्स ढांचे को व्यवस्थित करने के लिए लिया गया है और इसे किसी बड़े नीतिगत बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विवाद अभी थमने के आसार नहीं 

कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर टैक्स में राहत देने का फैसला फिलहाल केरल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष, सहयोगी दलों और सामाजिक संगठनों के विरोध के बीच सरकार अपने फैसले को प्रशासनिक सुधार बता रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या इस नीति में आगे कोई बदलाव किया जाता है।

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