सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को लेकर विधानसभा की Business Advisory Committee (BAC) की बैठक में सहमति बनी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पश्चिम बंगाल सरकार इस कानून का मसौदा किस रूप में पेश करती है और क्या यह असम में लागू मॉडल से प्रेरित होगा या फिर इसमें अलग प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
West Bengal UCC: चुनावी घोषणा पत्र में किया गया था बड़ा वादा
Suvendu Adhikari Statement: विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने अपने संकल्प पत्र में स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि पार्टी सरकार बनाती है तो छह महीने के भीतर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जाएगा। चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और इसे पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल बताया था।
सरकार का मानना है कि अब इस दिशा में विधायी प्रक्रिया शुरू कर चुनावी प्रतिबद्धता को अमल में लाया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता से किया गया वादा पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
किन राज्यों में पहले से लागू है UCC?
देश में अब तक उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे BJP शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जा चुका है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कुछ अन्य राज्यों में भी इस विषय पर विचार-विमर्श या तैयारी जारी है।
यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह विधेयक पारित हो जाता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो West Bengal UCC लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा।
क्या होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य?
प्रस्तावित Uniform Civil Code का मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। इसमें विवाह, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।
सरकार का तर्क है कि अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग व्यक्तिगत कानून होने के बजाय सभी नागरिकों पर एक समान नियम लागू होने चाहिए। प्रस्तावित व्यवस्था में बहुविवाह और तीन तलाक जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने तथा धर्म आधारित Personal Law की जगह समान नागरिक कानून लागू करने की बात भी शामिल है।
अमित शाह ने प्रचार के दौरान क्या कहा था?
चुनाव अभियान के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने UCC के समर्थन में कहा था कि देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना तुष्टीकरण है, या फिर ऐसी व्यवस्था जिसमें अलग-अलग समुदायों के लिए अलग नियम हों।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर एक विशेष समुदाय के हितों को प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया था। BJP लगातार यह दावा करती रही है कि समान नागरिक संहिता कानून के समक्ष सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देने की दिशा में अहम कदम है।
विपक्ष ने जताई अपनी चिंता
हालांकि, यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर विपक्षी दलों की राय अलग है। तृणमूल कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों का कहना है कि व्यक्तिगत कानून केवल कानूनी व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे धार्मिक स्वतंत्रता और समुदायों की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़े हुए हैं।
विपक्ष का तर्क है कि ऐसे किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी पक्षों से व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है ताकि किसी भी समुदाय की भावनाओं या अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
दो और कानूनों में संशोधन की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, UCC विधेयक के अलावा राज्य सरकार दो अन्य महत्वपूर्ण कानूनों से जुड़े प्रस्ताव भी विधानसभा में ला सकती है। इनमें पहला प्रस्ताव
West Bengal Maintenance of Public Order Act, 1972 में संशोधन से जुड़ा है।
यह कानून दंगा, आगजनी, लूटपाट, विस्फोटक पदार्थों के इस्तेमाल और सार्वजनिक हिंसा जैसे मामलों से संबंधित है। सरकार इसमें बदलाव कर कानून को और प्रभावी बनाने की तैयारी में है।
दूसरा प्रस्ताव 'West Bengal Public Safety and Control of Anti-Social Activities Bill, 2026' नाम से नया कानून लाने का है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करना और संगठित असामाजिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
सरकार क्यों ला रही है नए प्रावधान?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हाल के समय में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें हिंसक भीड़ ने पुलिस थानों और सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाया। इन घटनाओं को देखते हुए सरकार कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नए कानूनी प्रावधान लाना चाहती है।
प्रस्तावित कानूनों के तहत ऐसे अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखने की योजना है, ताकि गंभीर मामलों में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
अब विधानसभा की कार्यवाही पर नजर
West Bengal में UCC को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। एक ओर BJP इसे समान अधिकार और सुशासन की दिशा में बड़ा सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े संवेदनशील मुद्दे के रूप में देख रहा है। ऐसे में विधानसभा में प्रस्तावित विधेयक पर होने वाली चर्चा और आगे की प्रक्रिया पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।
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