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टीवी डिबेट में जातिगत टिप्पणी और मीडिया प्रतिनिधित्व पर सवाल, एंकरों की भूमिका पर बहस तेज

टीवी डिबेट में जातिगत टिप्पणियों और गालियों को लेकर सवाल उठे। स्क्रिप्ट में मीडिया नेतृत्व में सामाजिक विविधता की कमी पर भी चिंता जताई गई।

टीवी डिबेट में जातिगत टिप्पणी और मीडिया प्रतिनिधित्व पर सवाल, एंकरों की भूमिका पर बहस तेज
फोटो: Indian Media, Caste Debate, Chitra Tripathi, Sangeet Ragi, Media Representation

 

चित्रा त्रिपाठी के शो में टिप्पणी से विवाद

दिए गए वीडियो के अनुसार, एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और भाजपा समर्थक विचारों के लिए पहचाने जाने वाले संगीत रागी ने समाजवादी पार्टी प्रवक्ता मनोज काका के खिलाफ आपत्तिजनक जातिगत टिप्पणी की। वीडियो में आरोप है कि एंकर चित्रा त्रिपाठी ने टिप्पणी को तुरंत म्यूट नहीं किया और केवल असहज प्रतिक्रिया देती नजर आईं। वक्ता ने सवाल उठाया कि क्या यही व्यवहार किसी सवर्ण समुदाय के खिलाफ टिप्पणी होने पर भी होता।

पुराने कार्यक्रम का हवाला, दोहराए गए पैटर्न का आरोप

स्क्रिप्ट में सितंबर 2025 के एक अन्य कार्यक्रम का भी जिक्र है, जिसमें रागी पर मुसलमानों के अधिकारों को लेकर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया। वीडियो का दावा है कि दोनों घटनाओं में वही एंकर और पैनलिस्ट मौजूद थे, इसलिए इसे महज लाइव शो की गलती नहीं बल्कि एक पैटर्न के रूप में देखा जाना चाहिए। स्क्रिप्ट में 2023 के संसद विवाद का भी उल्लेख है, जब भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने बसपा सांसद दानिश अली के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।

मीडिया नेतृत्व में सामाजिक विविधता पर सवाल

वीडियो में Oxfam India और Newslaundry की रिपोर्ट Who Tells Our Stories Matters के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। स्क्रिप्ट के अनुसार, 2019 में 121 प्रमुख न्यूज़रूम पदों में 106 पर सवर्ण समुदायों के लोग थे और एक भी पद पर एससी या एसटी प्रतिनिधित्व नहीं था। 2022 की रिपोर्ट में भी नेतृत्व स्तर पर स्थिति में बहुत कम बदलाव का दावा किया गया।

स्क्रिप्ट के मुताबिक, हिंदी टीवी न्यूज़ में नेतृत्व पदों पर सवर्ण प्रतिनिधित्व 100% बताया गया, जबकि प्राइम टाइम एंकरों और पैनलिस्टों में भी सामाजिक विविधता सीमित रही। वीडियो इसी असंतुलन को टीवी बहसों में जाति, धर्म और सामाजिक मुद्दों की प्रस्तुति से जोड़ता है।

बहस की भाषा और मीडिया की जिम्मेदारी

वीडियो में सवाल उठाया गया है कि जब न्यूज़रूम की निर्णायक कुर्सियों और टीवी बहसों में सामाजिक प्रतिनिधित्व सीमित हो, तो बहसों का स्वरूप भी प्रभावित हो सकता है। वक्ता ने मीडिया से संविधानसम्मत भाषा, संयम और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर - https://youtu.be/_k5SzFT_sAo?si=DEmvferjZn4QL_r1

 
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