पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की दो महत्वपूर्ण मुलाक़ातें हुई थीं। पहली जुलाई 2024 में, जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद मॉस्को जाकर 22वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्हें रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ़ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से भी नवाज़ा गया। दूसरी मुलाकात अक्टूबर 2024 में कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।
Putin Visit India: व्यापार तनाव के बीच व्लादिमीर पुतिन का दौरा
पुतिन की यह भारत यात्रा ऐसे समय में होने जा रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव तेज़ हो गया है। अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की लगातार खरीद पर कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश के तहत भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया गया है।
इतना ही नहीं, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि रूस ने शुक्रवार तक यूक्रेन युद्ध को समाप्त नहीं किया, तो रूसी तेल के खरीदारों पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जो भारत जैसे देशों को सीधा प्रभावित कर सकते हैं।
इस बीच रूस की आधिकारिक मीडिया रिपोर्ट्स में यह संकेत भी मिल रहे हैं कि राष्ट्रपति पुतिन निकट भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी मुलाक़ात कर सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, इसी महीने के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन जाकर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं। यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में एक संभावित "रीसेट" की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है – खासतौर पर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (अक्टूबर 2024, कज़ान) में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच हुई मुलाक़ात में सीमा तनाव कम करने और द्विपक्षीय संवाद बहाल करने पर सहमति बनी थी। अब SCO मंच पर भारत, रूस और चीन – तीनों प्रमुख शक्तियों का एक साथ आना न केवल क्षेत्रीय सहयोग को गति देगा, बल्कि अमेरिका-यूरोप केंद्रित वैश्विक व्यवस्था को भी नई चुनौती दे सकता है।





