अयोध्या में शुक्रवार शाम से लापता एक युवती का नग्न अवस्था में शव मिलने की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। यह दुखद और चौंकाने वाली घटना कोतवाली क्षेत्र के सहनवा गांव में हुई, जहां हैवानों ने एक दलित युवती के साथ घिनौनी दरिंदगी की। यह घटना 30 जनवरी की रात की है, जब 22 वर्षीय युवती भागवत देखने के लिए घर से निकली थी। परिजनों के अनुसार, युवती रात करीब 11 बजे तक घर नहीं लौटी, जिससे परिवार में चिंता का माहौल बन गया। जब परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की, तो उन्हें अफसोसजनक ढंग से उसका कोई सुराग नहीं मिला।
बाद में, शनिवार सुबह नाले के पास युवती का शव अर्धनग्न अवस्था में बरामद हुआ, जो इस घटना की भयावहता को दर्शाता है। पास ही में खून से सने कपड़े पाए गए, जो यह साबित करते हैं कि युवती की हत्या बेहद बर्बरतापूर्ण तरीके से की गई थी।
शव की स्थिति देखकर साफ था कि पीड़िता को अत्यंत क्रूरता से मारा गया था। उसके हाथ-पैर टूटे हुए थे और उसकी आंखों को भी बुरी तरह से फोड़ दिया गया था। चेहरे पर कई जगह गहरे जख्मों के निशान थे।
इस अमानवीय और दर्दनाक हत्याकांड पर रविवार को सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने अयोध्या में आयोजित एक प्रेस वार्ता में अपनी भावनाएं जाहिर कीं। इस दौरान वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और फफक-फफक कर रो पड़े। सांसद ने कहा कि इस जघन्य कृत्य को देख कर उन्हें बहुत दुख हुआ, और उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे लोकसभा से इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाएंगे और न्याय की मांग करेंगे।
सांसद ने कहा कि इस घटना की तुलना निर्भया कांड से की जा सकती है, जहां एक बेटी के साथ क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दी गई थीं।
सांसद ने कहा कि दलित बेटी के साथ हुए सीधे अत्याचार ने समाज को शर्मसार किया है। इस घटना का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार इस भयावह घटना से दहशत में है और उनके मन में केवल डर और अशांति है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मृतका का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार नहीं किया गया। पुलिस प्रशासन ने जेसीबी मशीन का उपयोग करते हुए शव को मिट्टी में दफन कर दिया, जो कि अपमानजनक था।
सांसद ने राज्य सरकार से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उन्हें फांसी की सजा दिलाई जाए, ताकि इस प्रकार के अमानवीय कृत्यों को रोकने में मदद मिल सके।
इस घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़कर रख दिया है, बल्कि पूरे समाज में गहरी चिंता और आक्रोश का संचार कर दिया है। अब समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं और न्याय की मुख्यधारा में एक नई पहल करें।
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