इसके साथ ही उन्होंने पड़ोसी देशों और सहयोगियों पर भी दबाव बढ़ाया है।
रुबियो ने मुलिनो से मुलाकात के बाद कहा कि नहर क्षेत्र में चीन की उपस्थिति संधि के उल्लंघन के बराबर है, जिसके तहत पनामा को 1999 में नहर सौंपा गया था। उस संधि में यह स्पष्ट किया गया था कि नहर में स्थायी तटस्थता कायम रखी जाएगी और किसी भी विदेशी देश को इस क्षेत्र में सैन्य या अन्य प्रभाव डालने की अनुमति नहीं होगी। रुबियो ने मुलिनो से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि नहर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति इस संधि के खिलाफ है और इसे तुरंत रोकना जरूरी है।
बैठक के बाद, पनामा के राष्ट्रपति मुलिनो ने कहा कि रुबियो ने नहर पर फिर से कब्जा करने या बल प्रयोग की कोई वास्तविक धमकी नहीं दी, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण वाशिंगटन में चिंता बढ़ी है।
मुलिनो ने अपनी बातचीत को सम्मानजनक और सकारात्मक बताया और कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि इस समय संधि को कोई खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि पनामा की नहर के बंदरगाहों में चीन की भूमिका ने अमेरिका के लिए चिंता का कारण जरूर बना है, लेकिन इस मामले में पनामा सरकार ने एक निगरानी प्रणाली शुरू कर दी है। इस प्रणाली के तहत इन बंदरगाहों को नियंत्रित करने वाले संघ की पूरी लेखा परीक्षा की जा रही है। इसके अलावा, पनामा नहर प्राधिकरण रुबियो को इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देने की योजना बना रहा है।
रुबियो के इस दौरे के दौरान, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस समस्या का समाधान जल्दी नहीं किया गया, तो अमेरिका को अपनी संधि के तहत अधिकारों की रक्षा करने के लिए कदम उठाने होंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस बैठक के बाद बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि अमेरिका की ओर से यह संदेश दिया गया कि पनामा नहर क्षेत्र में स्थिति अब और स्वीकार्य नहीं हो सकती। अगर जल्द ही इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो अमेरिका को जरूरी कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ सकता है।
रुबियो ने अपने दौरे के दौरान नहर का निरीक्षण करने का भी प्रस्ताव रखा है और रविवार को उनका पनामा नहर का दौरा करने का कार्यक्रम है। यह दौरा पनामा और अमेरिका के बीच बढ़ते विवाद और चीन के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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