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अरविंद केजरीवाल के लिए अभी तक कोई बंगला नहीं, कोर्ट ने केंद्र से कहा, आवंटन अपनी मर्ज़ी से नहीं हो सकता

आदमी पार्टी (AAP) ने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में सरकारी आवास (bungalow) आवंटित करने की मांग की है। कोर्ट ने केंद्रीय आवास नीति की पारदर्शिता और नियमों |

अरविंद केजरीवाल के लिए अभी तक कोई बंगला नहीं, कोर्ट ने केंद्र से कहा, आवंटन अपनी मर्ज़ी से नहीं हो सकता
फोटो: Arvind Kejriwal
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि किसी भी सरकारी बंगले का आवंटन जब चाहे और जैसे चाहे नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) ने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में सरकारी आवास (bungalow) आवंटित करने की मांग की है। कोर्ट ने केंद्रीय आवास नीति की पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन पर सवाल उठाए हैं, जो अब सार्वजनिक ध्यान का विषय बन गया है।

नीति और नियम की मांग: केजरीवाल को मिलने वाला अधिकार


AAP की याचिका में बताया गया कि अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रीय संयोजक और मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते, सरकारी आवास पाने के पात्र हैं, यदि उनके नाम से कोई अन्य आधिकारिक आवास नहीं हो।

2014 की एक ऑफिस मेमरेंडम (Office Memorandum) के अनुसार “one residential accommodation would be allotted/allowed to be retained by the party president of a recognised national party provided that no other accommodation has been allotted to him/her in any other capacity।”

अदालत ने केंद्र सरकार से पिछले आवंटनों का रिकार्ड और यह नीति कैसे लागू हो रही है, उसकी जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।

35, Lodhi Estate और सरकारी प्रक्रिया पर सवाल


AAP ने 35, Lodhi Estate बंगला के लिए अपनी प्रस्तावित सूची में अरविंद केजरीवाल का नाम शामिल किया था। लेकिन केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि यह बंगला 24 जुलाई, 2025 को वितरित किया जा चुका है, और इसे वित्त राज्यमंत्री (MoS for Finance) पंकज चौधरी को आवंटित किया गया।

अदालत ने यह पूछा कि यदि आवासों की संख्या सीमित है, तो प्राथमिकता सूची कैसे तैयार की जाती है; आवंटन की श्रंखला (sequence) क्या है; और यह कि “डिस्क्रेशनरी पावर” (निजी निर्णय लेने की शक्ति) कहाँ तक मान्य है। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा कि आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और यह केवल अधिकारियों की मनमानी नहीं हो सकती।

अदालत की प्रतिक्रियाएँ और आगे की सुनवाई


अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि 25 सितंबर को इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान Housing Ministry के संयुक्त सचिव और Directorate of Estates के निदेशक वर्चुअली मौजूद हों।

साथ ही अदालत ने कहा है कि केंद्र सरकार को एक हलफनामा (affidavit) दाखिल करना होगा, जिसमें वर्तमान आवास नीति, पूर्व आवंटन, लागू की गई प्रक्रियाएं और प्रतीक्षा सूची (waiting list) शामिल हो।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि केंद्र सरकार का रुख इस मामले में देरी वाला प्रतीत होता है और वह selective तरीके से आवंटन कर रही है, जिससे “free-for-all” व्यवस्था जैसा माहौल बन गया है।