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राष्ट्रीय • दिल्ली

चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर नया खुलासा, ज्ञानेश कुमार को भेजी गई चिट्ठी

चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ शिकायत पत्र भेजा था।

चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर नया खुलासा, ज्ञानेश कुमार को भेजी गई चिट्ठी
फोटो: New Revelation on Election Commissioners' Complaint, Letter Sent to Gyanesh Kumar

चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद

चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेदों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक नया खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारियों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग के खिलाफ कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। इस पत्र को कैबिनेट सचिवालय ने ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को भेज दिया।


इस खुलासे में यह भी उल्लेख किया गया है कि कैबिनेट सचिवालय ने इन शिकायतों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश बत्रा द्वारा दर्ज किए गए आवेदन के जवाब में मिले दस्तावेजों से यह जानकारी प्राप्त हुई है।


कैबिनेट सचिवालय की प्रतिक्रिया

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त फाइलों में यह उल्लेख किया गया है कि कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्तों की शिकायतों पर कहा कि ये शिकायतें व्यक्तिगत रूप से की गई थीं, और चूंकि चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक पत्र नहीं आया था, इसलिए कार्रवाई करना अनुचित हो सकता है।


3 अगस्त को सचिवालय ने सीईसी ज्ञानेश कुमार से उनकी राय मांगने का प्रस्ताव रखा। वहीं 4 अगस्त के नोट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की चिट्ठी उनकी 'व्यक्तिगत क्षमता' में भेजी गई है।


शिकायतों की पृष्ठभूमि

यह मामला आईटी विभाग की फाइलों की रूटिंग और काम के बंटवारे को लेकर शुरू हुआ। चुनाव आयुक्तों ने आरोप लगाया कि जब डीईसी भानू प्रकाश येतुरु छुट्टी पर थे, तब मनीष गर्ग को प्रशासन विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसके बाद गर्ग ने कुछ ही घंटों में वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज का बंटवारा कर दिया।


आयुक्तों ने कहा कि इस प्रक्रिया में CEC/EC एक्ट 2023 के तहत उनसे कोई सलाह नहीं ली गई थी। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें विभाग से मांगी गई फाइल नहीं दी गई।


संवेदनशीलता और विवाद

यह खुलासा उस समय हुआ है जब चुनाव आयोग का आईटी विभाग और उसकी प्रमुख सीमा खन्ना केंद्र में हैं। हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नए आईटी सिस्टम ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की डेटाबेस तक पहुंच को सीमित कर दिया है, जिससे विवाद बढ़ा है।


इंडियन एक्सप्रेस की एक विशेष रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले दस महीनों में 14 बार मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर असहमति जताई, जबकि आयोग ने इन सभी दावों को खारिज किया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी निर्णय नियमों के अनुसार सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाते हैं।