राज्यों के बीच विवाद की पृष्ठभूमि
तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में एनडीए सरकारों के बीच 21 गांवों के मुद्दे पर विवाद बढ़ गया है। यह विवाद राज्य स्तर पर है, लेकिन अब आंध्र प्रदेश द्वारा पंचायत चुनावों की घोषणा के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। इस मामले में ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों ही राज्य इन गांवों पर अपने अधिकार का दावा करते हैं, और यह मामला पहले से ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
ओडिशा का कहना है कि ये गांव उसके कोरापुट जिले के पोटांगी ब्लॉक में आते हैं, जबकि आंध्र प्रदेश का दावा है कि ये पार्वतीपुरम मण्यम जिले के सालुर ब्लॉक में हैं। इस विवाद ने 1968 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
ऐतिहासिक संदर्भ और भूगोल
इन 21 गांवों का इतिहास 1936 से पहले का है, जब ये जेपोर एस्टेट का हिस्सा थे। जब ओडिशा प्रांत का गठन हुआ, तो एस्टेट का एक हिस्सा विशाखापट्टनम जिले में चला गया। हालांकि, कोटिया का सही मानचित्रण नहीं हो पाया, और 1956 में आंध्र प्रदेश के गठन के समय भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
जब यहां बॉक्साइट और ग्रेफाइट जैसे खनिजों की उपस्थिति का पता चला, तब दोनों राज्यों ने अपने-अपने दावों को मजबूती प्रदान करने की कोशिश की।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
ओडिशा सरकार ने 1968 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें यथास्थिति बनाए रखने के साथ-साथ यह भी कहा गया था कि इस मामले का समाधान संसद में होना चाहिए। लेकिन दोनों राज्य अदालत के आदेशों की व्याख्या अपने-अपने तरीके से कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों के पास दोनों राज्यों के आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र हैं, जिससे उनकी स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
चुनावों की पेचीदगियां
एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाता दोनों राज्यों में वोट डाल रहे हैं। विशेष रूप से, ओडिशा में मतदाताओं ने आंध्र प्रदेश के चुनावों के साथ एक ही दिन वोट डाला था। यह स्थिति चुनावी प्रक्रिया को और भी विवादास्पद बना देती है।
2021 में जब पंचायत चुनावों की घोषणा की गई थी, तब ओडिशा सरकार ने अदालत का सहारा लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोविड-19 के कारण ओडिशा सरकार ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी थी।
वर्तमान स्थिति और आगे की योजना
ओडिशा सरकार के मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि आंध्र प्रदेश द्वारा घोषित चुनावों को रोकने के उपायों पर बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया, 'हम 21 गांवों पर अपने अधिकार का दवा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करेंगे। हमें केंद्र सरकार से मार्गदर्शन लेने में भी संकोच नहीं होगा।'
इस प्रकार, यह विवाद न केवल राजनीतिक है, बल्कि यह क्षेत्र के निवासियों के लिए भी कई जटिलताओं को जन्म दे रहा है।





