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महबूबा मुफ्ती का तीखा हमला, 'इंडिया' गठबंधन में बढ़ी दरार

महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर दोहरे मापदंडों का आरोप लगाया।

महबूबा मुफ्ती का तीखा हमला, 'इंडिया' गठबंधन में बढ़ी दरार
फोटो: Mehbooba Mufti's Sharp Attack: Growing Rift in 'India' Alliance

महबूबा मुफ्ती का आरोप

1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की विशाल महारैली के बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और इसके अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कश्मीर की जनता के साथ हमेशा धोखा किया है और दिल्ली और श्रीनगर में उनके बयानों में अंतर है।


महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब फारूक अब्दुल्ला और अन्य नेता महारैली में एक साथ थे। उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर फारूक अब्दुल्ला के बयानों की असंगति को उजागर करते हुए कहा कि उनके दोहरे चेहरे के कारण जनता में भ्रमित स्थिति उत्पन्न हो रही है।


फारूक अब्दुल्ला के बयानों का विरोधाभास

महबूबा मुफ्ती ने फारूक अब्दुल्ला के हालिया बयानों का संदर्भ देते हुए कहा, "नेशनल कॉन्फ्रेंस का दोहरा चेहरा है- एक चेहरा कश्मीर के लिए और दूसरा दिल्ली के लिए। हाल ही में उन्होंने कहा था कि 'पाकिस्तान हमारे पीछे खड़ा है' और फिर दिल्ली में जाकर भारत के साथ होने की बात की।" उन्होंने सवाल उठाया कि आखिरकार फारूक अब्दुल्ला का असली रुख क्या है?


उन्होंने आगे कहा कि शेख अब्दुल्ला ने भारत के साथ विलय का निर्णय लिया और 'प्रधानमंत्री' की बजाय 'मुख्यमंत्री' का पद स्वीकार किया। कश्मीर की वर्तमान स्थिति के लिए पूरी तरह से नेशनल कॉन्फ्रेंस को जिम्मेदार ठहराया।


कश्मीर मुद्दे का हल

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों और वर्तमान सरकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस स्वायत्तता की मांग का सिर्फ दिखावा कर रही है, जबकि असली बदलाव लाने की उनकी कोई ताकत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी केवल पिछले दरवाजे से प्रवेश करने और कश्मीरियों पर अत्याचार करने के लिए जानी जाती है।


केंद्र सरकार की नीतियों के प्रति अपनी असहमति व्यक्त करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान UAPA जैसे कठोर कानूनों से नहीं हो सकता। वास्तविक संवाद और गरिमापूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने स्थायी शांति की मांग की।


राजनीतिक समीकरणों पर सवाल

महबूबा मुफ्ती का यह आक्रामक रुख, रामलीला मैदान की महारैली में फारूक अब्दुल्ला और अन्य विपक्षी नेताओं की एकजुटता के मात्र 24 घंटे बाद आया है। इस बयान ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति के साथ-साथ 'इंडिया' गठबंधन के भीतर भी एक दरार का संकेत दिया है।


इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता को लेकर उठ रहे सवालों को और गहरा कर दिया है, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं।