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Mamata Banerjee Crisis: TMC में फूट और बीजेपी पर आरोप तेज़

पश्चिम बंगाल की राजनीति में Mamata Banerjee Crisis बढ़ता जा रहा है। TMC में बागी विधायकों और बीजेपी के दखल के बीच ‘महाराष्ट्र मॉडल’ की चर्चा तेज़।

Mamata Banerjee Crisis: TMC में फूट और बीजेपी पर आरोप तेज़
फोटो: Mamata Banerjee Crisis, West Bengal Politics
Mamata Banerjee Crisis: पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनाव के बाद लगातार तनाव और उठापटक देखने को मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर फूट और बागी तेवर बढ़ते जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ की चर्चा तेज हो गई है।

Mamata Banerjee Crisis: बागी विधायकों की बढ़ती संख्या

पश्चिम बंगाल में हाल ही में दो TMC विधायकों — Ritabrata Bandopadhyay और Sandipan Saha को पार्टी से बाहर कर दिया गया। इसका कारण था पार्टी के खिलाफ आवाज उठाना और हस्ताक्षर विवाद में Whistleblower बनने का प्रयास। इन घटनाओं के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या बंगाल में भी महाराष्ट्र की तरह पार्टी में फूट डालने की तैयारी की जा रही है।

सूत्रों का दावा है कि अब तक पार्टी के करीब 50 विधायक अलग होने की कगार पर हैं। और इस स्थिति को उन्होंने Mamata Banerjee Crisis से जोड़कर देखा, इसके अलावा कुछ सांसदों में भी बागी तेवर देखने को मिल रहे हैं और उनकी बातचीत इसी दिशा में चल रही है।

ममता बनर्जी का आरोप: बीजेपी की भूमिका

TMC प्रमुख Mamata Banerjee ने पार्टी में उभरी इस अशांति के लिए न सिर्फ आंतरिक गुटों को जिम्मेदार ठहराया, बल्कि भाजपा (BJP) को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी डर, धमकी और पैसे का लालच देकर TMC के विधायकों और सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है।

ममता ने फेसबुक लाइव में बताया कि चार विधायकों ने उनसे शिकायत की कि उन्हें पुलिस द्वारा धमकाया जा रहा है। उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि वे बैठक में शामिल हुए तो ‘Arms Act’ के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है। ममता ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार दिया और कहा, इस राज्य में ज़ुल्म की सारी हदें पार हो चुकी हैं।

बैठकों में अनुपस्थिति और गुटबाजी 

पिछले हफ्ते शनिवार को कालीघाट में हुई TMC की बैठक में कुल 80 विधायकों में से कम से कम 60 विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी की स्थिति को और जटिल बना दिया। वहीं, कुछ विधायक Rathin Ghosh के घर पर एकत्र हुए। रथिन ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए वे बैठक में शामिल नहीं हो सके। 

इस घटनाक्रम ने पार्टी में गुटबाजी को और हवा दे दी है। जिसे उन्होंने Mamata Banerjee Crisis से जोड़कर देखा, कई विधायकों ने खुलेआम पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अपनी राय व्यक्त की और कुछ को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया गया।

‘महाराष्ट्र मॉडल’ की चर्चा

Maharashtra Model Politics: राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बंगाल में यह हालात महाराष्ट्र के 2022 मॉडल से मिलते-जुलते हैं। उस समय शिवसेना में फूट पड़ी थी, जिसमें कुछ विधायकों ने पार्टी छोड़कर अलग रास्ता चुना। अब बंगाल में भी इसी तरह की संभावनाओं पर अटकलें लगाई जा रही हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यदि TMC के भीतर यह फूट और बागी रवैया बढ़ता है, तो Mamata Banerjee और उनके परिवार के राजनीतिक प्रभुत्व पर सीधे असर पड़ सकता है।

TMC के भीतर राजनीतिक तनाव का भविष्य

पश्चिम बंगाल की सियासत में आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC अपने बागी विधायकों और सांसदों को संभाल पाती है या नहीं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों की गैर-हाजिरी और उनके अलग समूह बनाना इस बात का संकेत है कि संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है। Mamata Banerjee और उनके बेटे Abhishek Banerjee की पार्टी में पकड़ को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब BJP लगातार विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है।

West Bengal Politics फिजा इस समय काफी अस्थिर है। TMC के भीतर फूट की संभावना बढ़ रही है और बीजेपी के हस्तक्षेप के आरोप इसे और जटिल बना रहे हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या बंगाल में भी महाराष्ट्र की तरह पार्टी में फूट होती है, या TMC अपनी एकजुटता बनाए रख पाएगी।

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