India-Myanmar Relations: चुनाव और राजनीतिक पृष्ठभूमि
President Hlaing Visit: म्यांमार में हाल ही में संसदीय चुनाव हुए, जो दिसंबर और जनवरी में कराए गए। इन चुनावों के परिणामस्वरूप सत्ता पर नया नेतृत्व आया, क्योंकि फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने तख्तापलट कर आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को हटाया था। राष्ट्रपति ह्लाइंग की भारत यात्रा इस नए राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सीमा सुरक्षा और सशस्त्र समूहों की चुनौती
India-Myanmar Border: विदेश सचिव Vikram Misri ने बताया कि PM Modi ने म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों पर चिंता जताई। ये समूह भारत की सीमाओं के नजदीकी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिससे भारत के सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। कभी-कभी इन क्षेत्रों में नुकसान या व्यवधान होने के कारण शरणार्थियों का भारत में प्रवेश भी होता है।
इसके जवाब में, म्यांमार सेना द्वारा इन समूहों के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन वे अक्सर सीमावर्ती क्षेत्रों में ही सीमित रहते हैं। इसके मद्देनजर भारत ने सीमा पर बाड़बंदी, प्रवेश द्वार और जांच चौकियों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर रखी है।
व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर
दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापारिक सहयोग के महत्व पर भी चर्चा की। भारत और म्यांमार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की रुचि व्यक्त की। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने India-Myanmar-Thailand त्रिपक्षीय राजमार्ग और कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन
विदेश सचिव Vikram Misri ने कहा कि प्रधानमंत्री Modi ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की। इस दौरान India-Myanmar Relations को और मजबूत बनाने पर जोर देते हुए दोनों नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के क्षेत्रीय दुरुपयोग को रोकना आवश्यक है, ताकि उनकी सुरक्षा हितों को खतरा न हो। म्यांमार के राष्ट्रपति ने विशेष रूप से यह दोहराया कि उनका देश भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं देगा।
रणनीतिक साझेदारी और पूर्वोत्तर भारत
म्यांमार भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ोसी है और यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों – विशेष रूप से उग्रवाद प्रभावित नागालैंड और मणिपुर के साथ लगभग 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। विदेश सचिव मिसरी ने बताया कि इस यात्रा ने भारत और म्यांमार के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत किया है और दोनों पक्षों ने क्षेत्र में पारस्परिक लाभ, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल और आगे की यात्रा
राष्ट्रपति ह्लाइंग के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगपति शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval ने रविवार को राष्ट्रपति ह्लाइंग से मुलाकात कर India-Myanmar Relations से जुड़े मुख्य मुद्दों पर चर्चा की। ह्लाइंग आज मुंबई जाएंगे और वहां भी भारत-म्यांमार सहयोग को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
इस तरह, भारत और म्यांमार के बीच सुरक्षा, व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत हो रही है। दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए काम करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
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