अयातुल्ला खामेनेई मौत पर भारत की चुप्पी
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके लिखा कि भारत ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा तो की है, लेकिन अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों पर सरकार पूरी तरह चुप है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ईरान BRICS+ मंच का सदस्य है, और भारत इसी वर्ष BRICS+ की अध्यक्षता कर रहा है। जयराम रमेश ने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई मौत पर भारत की चुप्पी अमेरिका और इज़राइल के हमलों पर मौन रहना, समझौते वाले नेतृत्व के संकेत के रूप में देखा है, ताकि भारत अपने पश्चिमी मित्र देशों को नाराज न करे।
इब्राहिम रईसी की मौत पर दिखाया गया राजकीय शोक
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि अयातुल्ला खामेनेई मौत पर भारत की चुप्पी क्यों रही, यह तुलना भी की कि मोदी सरकार ने मई 2024 में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु के बाद राजकीय शोक घोषित किया था। उस समय 21 मई 2024 को एक दिन का राजकीय शोक रखा गया और 1 जुलाई 2024 को संसद में शोक प्रस्ताव भी पेश किया गया था। रमेश ने सवाल उठाया कि इब्राहिम रईसी के लिए दिखाया गया संवेदनशील रवैया खामेनेई के मामले में क्यों नहीं अपनाया गया।
राजनीतिक विमर्श और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
कांग्रेस नेता का यह बयान उस समय आया है जब ईरान-इज़राइल-अमेरिका के बीच तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। रमेश ने इस मामले को भारत की अंतरराष्ट्रीय नीति और दोस्ती-रिश्तों के परिप्रेक्ष्य से जोड़ा। उनका कहना है कि मोदी सरकार अमेरिकी और इज़राइली सहयोगियों को नाराज करने से बच रही है, जिसके चलते उच्चस्तरीय राजकीय प्रतिक्रियाओं में देरी हुई है।
इस घटना ने न केवल विदेश नीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारत की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दृष्टिकोण को लेकर भी राजनीतिक बहस को जन्म दिया है।
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