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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का 'जन महाभियोग': जानिए क्या है पूरा मामला और संवैधानिक प्रक्रिया

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का प्रतीकात्मक जन महाभियोग। विपक्षी नेताओं ने लगाए चुनाव आयोग पर 6 गंभीर आरोप।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का 'जन महाभियोग': जानिए क्या है पूरा मामला और संवैधानिक प्रक्रिया
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विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' (INDIA Block) ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में एक प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' (Mock Impeachment) का आयोजन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सरकारी आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी और सोनिया गांधी सहित कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठाते हुए जनता के सामने अपनी बात रखना था।

 

ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष द्वारा लगाए गए 6 प्रमुख आरोप

मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छह प्रमुख आरोप प्रस्तुत किए:

  1. चुनाव प्रक्रिया में धांधली की साजिश: मतदाता सूची में अनुचित बदलाव कर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप।

  2. SIR के तहत नाम काटना: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप।

  3. फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव: नया नाम जोड़ने की प्रक्रिया को जटिल बनाकर योग्य मतदाताओं के लिए अड़चनें पैदा करना।

  4. ECI-NET द्वारा केंद्रीकरण: डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्थानीय अधिकारियों की भूमिका को कमजोर कर मतदाता सूची का केंद्रीकरण करना।

  5. सहयोगी आयुक्तों की उपेक्षा: चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और लिखित सवालों को अनदेखा करने का आरोप।

  6. निष्पक्षता पर सवाल: केंद्र सरकार और सत्ताधारी दल के दबाव में काम करने का आरोप।

 

एसआईआर (SIR) विवाद और आम जनता की गवाही

कार्यक्रम में केवल राजनीतिक भाषण ही नहीं हुए, बल्कि एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया से प्रभावित आम नागरिकों ने भी अपनी व्यथा सुनाई। कांता प्रसाद नामक एक नागरिक ने बताया कि वे जीवित हैं, लेकिन मतदाता सूची में उन्हें 'मृत' दर्ज कर दिया गया है। वहीं माया देवी नामक महिला ने बताया कि उनकी पहचान आईडी खत्म कर दी गई।

चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य फर्जी, स्थानांतरित या मृत मतदाताओं (ASD श्रेणी) की प्रविष्टियों को हटाना है और मतदाताओं को आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाता है।

 

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की असली संवैधानिक प्रक्रिया?

संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए अपनाई जाती है।

  • शुरुआत: इसके लिए लोकसभा के कम से कम 100 या राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ सभापति/स्पीकर को नोटिस देना होता है।

  • जांच समिति: नोटिस स्वीकार होने पर 3-सदस्यीय जांच समिति (जिसमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज व कानूनविद शामिल हों) का गठन होता है।

  • संसद में वोटिंग: आरोपों के सिद्ध होने पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 समर्थन) से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है।

  • अंतिम आदेश: प्रस्ताव पास होने के बाद राष्ट्रपति पद से हटाने का आदेश जारी करते हैं।

विपक्ष ने मार्च 2026 में संसद में महाभियोग का नोटिस दिया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति द्वारा इसे स्वीकार न किए जाने के बाद विपक्ष ने संसद के बाहर यह प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' आयोजित करने का रास्ता चुना IG

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर- https://youtu.be/ZXHLFHs2lV4?si=fhbMHKdvtyuz3l5T

 
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