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'भारत की बात सुनाता हूं'... क्या मनीष तिवारी के गीत में छिपा कांग्रेस की नाराज़गी का इशारा?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी तथा तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को इस चर्चा में बोलने का मौका नहीं दिया गया।

'भारत की बात सुनाता हूं'... क्या मनीष तिवारी के गीत में छिपा कांग्रेस की नाराज़गी का इशारा?
फोटो: 'भारत की बात सुनाता हूं'... क्या मनीष तिवारी के गीत में छिपा कांग्रेस की नाराज़गी का इशारा?
संसद के मॉनसून सत्र के छठे दिन यानी सोमवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर लोकसभा में बहस के दौरान कांग्रेस पार्टी के अंदर गुटबाजी की अटकलें तेज हो गईं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी तथा तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को इस चर्चा में बोलने का मौका नहीं दिया गया। इसे लेकर मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी ही पार्टी को निशाने पर लिया, जबकि थरूर ने चुप्पी साध ली।

मनीष तिवारी की काव्यात्मक पोस्ट


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने जानबूझकर कुछ नए सांसदों को बोलने का मौका दिया। पार्टी के एक सांसद के अनुसार, मनीष तिवारी और शशि थरूर पहले भी सरकार की विदेश नीति या सैन्य कार्रवाई को लेकर सकारात्मक टिप्पणियां कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी ने उन नेताओं को तरजीह दी जो पूरी तरह पार्टी लाइन के अनुरूप सरकार की आलोचना कर सकें।

इस फैसले से असहमति जताते हुए मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक काव्यात्मक पोस्ट साझा की,  “है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं।” यह पोस्ट कई राजनीतिक संकेतों से भरी मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी के रुख पर सवाल उठाया है।

शशि थरूर का 'मौनव्रत'


कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने शशि थरूर से भी चर्चा में भाग लेने का अनुरोध किया था। लेकिन थरूर ने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर को वे एक सफल सैन्य कार्रवाई मानते हैं और इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना नहीं कर सकते। पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाने पर थरूर ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी, “मौनव्रत, मौनव्रत।” गौरतलब है कि मनीष तिवारी और शशि थरूर दोनों ही ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इनका कार्य था सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर करना। इसी वजह से दोनों नेताओं ने सरकार के दृष्टिकोण के कई पहलुओं का समर्थन किया था।