प्रशांत भूषण के बयान पर विवाद
वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण द्वारा 'रिजीम चेंज' के संदर्भ में दिए गए बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बयान को बांग्लादेश से जोड़ते हुए भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश के रूप में पेश किया है। इस पर प्रतिक्रियास्वरूप कांग्रेस ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है, कि उनका उद्देश्य चुनाव के माध्यम से रिजीम चेंज करना है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस, बांग्लादेश की तर्ज पर, सत्ता परिवर्तन की योजना बना रही है। इस पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 'हम रिजीम चेंज करना चाहते हैं और हम रिजीम चेंज करेंगे', यह स्पष्ट करते हुए कि उनका लक्ष्य लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन करना है।
जनता का आक्रोश और सरकार की प्रतिक्रिया
पवन खेड़ा ने आगे कहा कि देश में युवा वर्ग का आक्रोश बढ़ता जा रहा है, और वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का गुस्सा इस बात का संकेत है कि वह सत्ता से जाने वाली है। वह यह समझाने की कोशिश कर रहे थे कि जनता की आवाज सुनने के बजाय, सत्ताधारी दल विरोध को दबाने की कोशिश कर रहा है।
खेड़ा ने कहा, 'जनता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से सवाल पूछ रही है, लेकिन जवाब भारतीय जनता पार्टी दे रही है।' उन्होंने भाजपा के 'वोट चोर, गद्दी छोड़' अभियान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की बात कर रही है, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को गुस्सा क्यों आ रहा है।
सरकार की नीतियों पर सवाल
कांग्रेस नेता ने यह बात भी उठाई कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2013 में 'रिजीम चेंज' की बात की थी, तब भाजपा को यह ठीक लग रहा था, लेकिन अब जब प्रशांत भूषण ऐसा कह रहे हैं, तो भाजपा को आपत्ति होने लगी है। खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शनकारियों को अराजकता की राजनीति में शामिल करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने सवाल किया कि सरकार प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर को खुला क्यों नहीं छोड़ती और विरोध करने की अनुमति क्यों नहीं देती। खेड़ा ने कहा कि व्यापारियों को हो रहे नुकसान के लिए विपक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, बल्कि इसकी जिम्मेदारी सरकार की है।





