मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखा था पत्र
इससे पहले, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे एक पत्र में लोकायुक्त अधिनियम को लागू करने की अपनी मांग रखते हुए, हजारे ने कथित तौर पर कहा था कि वह देश के हित के लिए अपने जीवन का बलिदान देने को सौभाग्यशाली मानेंगे।
हजारे ने आरोप लगाया कि पिछले साल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने के बावजूद, कानून के क्रियान्वयन में कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में इस कानून को लागू करने की इच्छाशक्ति का अभाव है और अन्ना हजारे की चेतावनी का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करना है।
मूल लोकायुक्त विधेयक विधानसभा द्वारा 28 दिसंबर, 2022 को और विधान परिषद द्वारा 15 दिसंबर, 2023 को पारित किया गया था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक को मंजूरी दे दी, लेकिन राज्य को तीन महत्वपूर्ण संशोधन शामिल करने की सिफारिश की थी।
हालांकि,अन्ना हजारे के विरोध प्रदर्शन की खबर के बाद मीडिया सूत्रों के मुताबिक, फडणवीस ने अन्ना हजारे से संपर्क है और उन्हें आश्वासन दिया गया है कि लोकायुक्त विधेयक जल्द ही लागू किया जाएगा। मीडिया सूत्रों के अनुसार हजारे के कार्यालय ने बताया, “मुख्यमंत्री और उनके सचिव ने अन्ना हजारे से बात की और उन्हें सूचित किया कि लोकायुक्त विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है और इसे अगले तीन महीनों के भीतर लागू कर दिया जाएगा।” महाराष्ट्र सरकार का निर्णय अब अन्ना हजारे की तरफ झुकता नजर आ रहा है। इसके बावजूद, अन्ना हजारे की चेतावनी अभी भी कायम है क्योंकि वे क्रियान्वयन के ठोस कदमों का इंतजार कर रहे हैं।
2022 में भी भूख हड़ताल की
2022 में, हजारे ने लोकायुक्त कानून की मांग करते हुए रालेगन सिद्धि में भूख हड़ताल की। हालांकि, फडणवीस की मध्यस्थता के बाद विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया गया। हजारे के विरोध के बाद, एक समिति का गठन किया गया और लोकायुक्त अधिनियम का मसौदा तैयार किया गया, जिसे महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया। बाद में इसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा गया।
लेकिन अब कार्यान्वयन में देरी के कारण अस्सी वर्षीय कार्यकर्ता ने फिर से भूख हड़ताल का आह्वान किया। हजारे को 2011 में तब प्रसिद्धि मिली जब उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में भूख हड़ताल शुरू की। इस विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप अंततः दिल्ली और केंद्र दोनों से कांग्रेस सरकार सत्ता से बाहर हो गईं और अरविंद केजरीवाल जैसे नए चेहरे, जो आम आदमी पार्टी के संयोजक हैं, राष्ट्रीय राजनीति में उभर कर सामने आए।
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