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ट्रेड डील से रूसी तेल तक: क्यों अहम है मार्को रुबियो का भारत दौरा?

दिल्ली नहीं, मुंबई और जामनगर जाएंगे रुबियो।

ट्रेड डील से रूसी तेल तक: क्यों अहम है मार्को रुबियो का भारत दौरा?
फोटो: Image Credit: Council on Foreign Relations (CFR)

भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिहाज से अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का आगामी दौरा अहम माना जा रहा है। रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक उज्बेकिस्तान और भारत की यात्रा करेंगे। भारत में उनके कार्यक्रम में मुंबई और गुजरात का जामनगर शामिल है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 20 अक्टूबर को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित है। इसमें व्यापार, ऊर्जा, निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण व उभरती तकनीक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देश रणनीतिक संबंध मजबूत करना चाहते हैं, लेकिन व्यापार और रूस से तेल खरीद को लेकर मतभेद भी बने हुए हैं। ऐसे में इस बैठक से संकेत मिल सकते हैं कि दोनों पक्ष इन मुद्दों पर समाधान की दिशा में कितना आगे बढ़ पाते हैं।

ट्रेड डील पर प्रगति, लेकिन कुछ मुद्दे बाकी

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण पर बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने की बात कही जा रही है। 15 अक्टूबर को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समझौते के प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और कानूनी मसौदे पर काम जारी है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत दिया है। हालांकि, समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने से जुड़ी प्रक्रिया अभी बाकी है। फरवरी में घोषित व्यापार ढांचे के तहत भारतीय सामान पर अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ दर 18% रखने की बात कही गई थी। हालांकि, अंतिम समझौते की शर्तों और उसके लागू होने की स्थिति को लेकर स्पष्टता जरूरी है। भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले नुकसान न हो। अमेरिकी बाजार में टैरिफ की दर भारतीय उत्पादों की कीमत और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती है।

रूसी तेल और 100% टैरिफ की आशंका

रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी इस दौरे के अहम विषयों में शामिल हो सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका मॉस्को की ऊर्जा से होने वाली कमाई पर दबाव बनाना चाहता है। वहीं, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, कीमतों और आपूर्ति को ध्यान में रखकर तेल खरीद से जुड़े फैसले करता है।

सितंबर में अमेरिकी कानून के तहत राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100% टैरिफ अपने आप लागू हो गया है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि अमेरिकी टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी उसके निर्यात को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में व्यापार वार्ता के दौरान इस मामले पर स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी।

जामनगर में रिलायंस से मुलाकात पर नजर

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, रुबियो की यात्रा में कारोबारी संपर्क और निवेश पर भी जोर रहेगा। उनके कार्यक्रम में मुंबई और गुजरात के जामनगर में रिलायंस से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की योजना भी बताई गई है। जामनगर में रिलायंस का बड़ा रिफाइनरी परिसर है, इसलिए यह पड़ाव ऊर्जा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अभी किसी नई तेल डील या निवेश समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस मुलाकात से संभावित सहयोग की उम्मीद तो की जा सकती है, लेकिन किसी सौदे को तय मानना सही नहीं होगा।

रक्षा और तकनीक भी एजेंडे में

जयशंकर और रुबियो की बैठक में रक्षा तथा महत्वपूर्ण और उभरती तकनीक पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देश इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, बैठक के एजेंडे में इन मुद्दों का शामिल होना किसी नई रक्षा खरीद या तकनीकी समझौते की घोषणा की गारंटी नहीं है। इसी दौरान जयशंकर 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाहयान की मेजबानी भी करेंगे। यह बैठक भारत और UAE के बीच व्यापार, निवेश तथा ऊर्जा सहयोग पर चर्चा का अवसर होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा?

मार्को रुबियो का यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत की कोशिश होगी कि व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति हो और रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता कम हो। वहीं, अमेरिका भारत के साथ व्यापार और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना चाहता है। अब सबकी नजर 20 अक्टूबर की बैठक पर होगी। क्या दोनों देश व्यापारिक मतभेदों को सुलझाकर किसी ठोस समझौते की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे, या रूसी तेल और टैरिफ का विवाद रिश्तों के बीच चुनौती बना रहेगा? इसका जवाब बैठक के बाद सामने आने वाले आधिकारिक बयानों और आगे की बातचीत से ही मिलेगा।