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अंतरराष्ट्रीय • दिल्ली

अमेरिकी टैरिफ की धमकी पर भारत का दोटूक जवाब, "ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि"

यूएस संसद में बिल पास होने के बाद भारत का सख्त रुख; कहा—प्रतिबंधों से पूरे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा बुरा असर।

अमेरिकी टैरिफ की धमकी पर भारत का दोटूक जवाब, "ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि"
फोटो: India Energy Security, US Russia Oil Tariffs, Russian Crude Oil Import, India US Trade Relations, MEA India Response

अमेरिकी संसद द्वारा रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का विधेयक पारित किए जाने के बाद भारत सरकार ने इस पर अपनी कड़ी और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को साफ किया कि देश की 140 करोड़ से अधिक आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फैसले किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों और बाजार की स्थितियों को देखकर ही लेगा।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के मुख्य बिंदु:

  • ऊर्जा सुरक्षा की प्राथमिकता: भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए विभिन्न वैश्विक स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा। बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार रणनीतिक निर्णय लिए जाते रहेंगे।

  • अमेरिका से उच्चस्तरीय वार्ता: इस मुद्दे पर बीते कुछ महीनों के दौरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर लगातार बातचीत हुई है, जिसमें भारत ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

  • वैश्विक बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव: भारत ने आगाह किया है कि इन प्रतिबंधों का असर केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है।

  • व्यापारिक हितों का संरक्षण: सरकार भारतीय उद्योग और व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर इस नए घटनाक्रम से पड़ने वाले संभावित प्रभावों से निपटने की तैयारी कर रही है। भारत अपने आर्थिक व व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

    क्या है नया अमेरिकी कानून?

    अमेरिकी संसद में पारित नया बिल राष्ट्रपति को रूस से तेल का आयात करने वाले देशों (जैसे भारत और चीन) पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून का रूप ले लेगा। रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन भारत ने अपने रुख से साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा संप्रभुता सर्वोपरि है।