अंदरूनी सर्वे से बनी रणनीति
कांग्रेस के सर्वे में यह पाया गया कि अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच पार्टी की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन आम आदमी पार्टी (AAP) अब भी बढ़त बनाए हुए है। इस चुनौती को देखते हुए, पार्टी ने तय किया है कि अगले दौर के प्रचार में सभी प्रमुख नेता और कार्यकर्ता इन 12 सीटों पर पूरी ताकत लगाएंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का प्रचार अभियान 27 या 28 जनवरी से शुरू होगा। कांग्रेस की योजना है कि अंतिम पांच से छह दिनों में हर रोज़ बड़े नेताओं की कम से कम एक रैली आयोजित की जाए। यह रणनीति उन सीटों पर फोकस करने की है, जहां पार्टी को जीतने की उम्मीद है।
नाराज सीनियर नेताओं को सक्रिय करने की कोशिश
कांग्रेस के फैसलों में रायशुमारी न होने के कारण कई सीनियर नेता नाराज होकर प्रचार से दूर हो गए थे। इसे ध्यान में रखते हुए, एआईसीसी मुख्यालय में लगातार बैठकों का दौर जारी है। हाल ही में दिल्ली कांग्रेस से जुड़े सीनियर नेताओं की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा, दिल्ली महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अमृता धवन, और पूर्व मंत्री मंगत राम सिंघल समेत अन्य नेताओं को बुलाया गया। इन नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गईं और सक्रिय रूप से प्रचार में शामिल होने को कहा गया।
जीत की संभावना वाली सीटों की पहचान
सर्वे के आधार पर पार्टी ने उन सीटों को प्राथमिकता दी है, जहां जीत की संभावनाएं मजबूत हैं। इनमें:
- नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र: 2 सीटें
- नॉर्थवेस्ट लोकसभा क्षेत्र: 2-3 सीटें
- चांदनी चौक और नॉर्थईस्ट लोकसभा क्षेत्र: 5-6 सीटें
- पूर्वी दिल्ली: 1-2 सीटें साउथ और वेस्ट दिल्ली: 1-2 सीटें
सर्वे में यह भी सामने आया है कि अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत हुई है। पार्टी का मानना है कि इन वोटरों को मजबूत तरीके से साधने के लिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की रैलियां असरदार साबित होंगी।
Read This Also:- Delhi Polls: ब्राह्मण और पूर्वांचली वोटों को साधने के लिए BJP का दांव, यूपी के डिप्टी CM बृजेश पाठक को बड़ी जिम्मेदारी
Read This Also:- Delhi Polls: ब्राह्मण और पूर्वांचली वोटों को साधने के लिए BJP का दांव, यूपी के डिप्टी CM बृजेश पाठक को बड़ी जिम्मेदारी





