बृजेश पाठक, जो उत्तर प्रदेश में भाजपा के ब्राह्मण चेहरे माने जाते हैं, 19 जनवरी को यूपी भाजपा के 25 कार्यकर्ताओं की एक टीम के साथ दिल्ली पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, वे केवल एक दिन के लिए, बुधवार को, प्रयागराज गए थे। प्रयागराज में उन्हें योगी कैबिनेट की बैठक में भाग लेना था और संगम में डुबकी लगाने के बाद वे उसी शाम दिल्ली लौट आए।
शहजाद पूनावाला की टिप्पणी के बाद बदली रणनीति
शुरुआत में भाजपा की योजना थी कि बृजेश पाठक केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में प्रचार करें, लेकिन पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए उन्हें पूरी तरह से चुनाव प्रचार में झोंकने का निर्णय लिया। यह बदलाव भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला की टिप्पणी के कारण हुआ, जिसने दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचलियों के बीच असंतोष पैदा कर दिया था। शहजाद पूनावाला ने एक टेलीविजन डिबेट के दौरान पूर्वांचलियों (पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों) पर टिप्पणी की थी, जिसे आम आदमी पार्टी ने अपमानजनक करार देते हुए बड़ा मुद्दा बना लिया। इस विवाद के कारण भाजपा को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद शहजाद पूनावाला ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी।
बदलती रणनीति और नई जिम्मेदारियां
पार्टी ने शुरू में बृजेश पाठक को अरविंद केजरीवाल सरकार के उस वादे के खिलाफ प्रचार की जिम्मेदारी दी थी, जिसमें उन्होंने पुजारियों को 18,000 रुपये की सम्मान राशि देने का ऐलान किया था। लेकिन शहजाद पूनावाला की टिप्पणी से उत्पन्न विवाद के बाद पार्टी ने पाठक की भूमिका को विस्तार देते हुए उन्हें पूरी तरह से चुनाव प्रचार में सक्रिय कर दिया।
भाजपा के अनुसार, बृजेश पाठक न केवल पार्टी के लिए ब्राह्मण समुदाय को साधने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि पूर्वांचली मतदाताओं के बीच हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए भी प्रयासरत हैं। पार्टी ने उन्हें चांदनी चौक क्षेत्र के दस विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार की जिम्मेदारी देकर इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया है।
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