यह कदम दिल्ली में विशेष रूप से उत्तर भारत के मतदाताओं, खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के बीच मजबूत प्रभाव बनाने की दिशा में उठाया गया है।
जदयू ने गुरुवार को इस सीट से शैलेंद्र कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। शैलेंद्र कुमार को जदयू ने बुरारी सीट से चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया है, क्योंकि इस सीट पर उनके प्रभाव और समर्पण को देखते हुए पार्टी को लगता है कि वह इस चुनाव में भाजपा और जदयू के गठबंधन की उम्मीदों पर खरे उतर सकते हैं। बुरारी सीट पर भाजपा और जदयू के गठबंधन की ताकत को ध्यान में रखते हुए, यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह सीट भाजपा के लिए एक अहम कड़ी साबित हो सकती है।
BJP ने पहले ही दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 69 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है, और केवल एक सीट पर उम्मीदवार का चयन बाकी है। इस अंतिम सीट को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं, और माना जा रहा है कि यह सीट लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा-रामविलास) को दी जा सकती है, जिससे पार्टी में एक और नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है।
इस गठबंधन से यह साफ होता है कि भाजपा और जदयू का साझा प्रयास दिल्ली विधानसभा चुनाव में विपक्षी दलों के खिलाफ एक मजबूत रणनीति के रूप में उभरेगा, जो गठबंधन की ताकत को और बढ़ाएगा। दिल्ली के इस चुनाव में भाजपा और जदयू का यह गठबंधन यह साबित करने के लिए तैयार है कि वे मिलकर एक मजबूत और प्रभावशाली गठबंधन के रूप में दिल्ली की राजनीतिक लड़ाई में उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
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