अरविंद केजरीवाल का मुकाबला दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों से
नई दिल्ली सीट पर इस बार आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मुकाबला दिल्ली के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों से है। भाजपा ने इस सीट से प्रवेश वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, जो पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं, जबकि कांग्रेस ने इस सीट से संदीप दीक्षित को मैदान में उतारा है, जो पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे हैं। इस सीट पर तीन प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी दिलचस्प हो सकती है, खासकर जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली की राजनीति में एक मजबूत चेहरा बन चुके हैं।
कस्तूरबा नगर सीट पर सबसे कम नामांकन
कस्तूरबा नगर विधानसभा सीट पर सबसे कम नामांकन दाखिल किए गए हैं, जहां कुल 9 नामांकन पत्र दाखिल हुए हैं। यहां से आम आदमी पार्टी ने रमेश पहलवान को उम्मीदवार बनाया है, भाजपा ने नीरज बसोया को अपना प्रत्याशी घोषित किया है, जबकि कांग्रेस ने अभिषेक दत्त को मैदान में उतारा है। इस सीट पर नामांकनों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद मुकाबला दिलचस्प हो सकता है, क्योंकि तीनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों में से कोई भी अपनी पार्टी की हार को नहीं स्वीकार करेगा।
कालकाजी और पटपड़गंज सीट पर भी कड़ी प्रतिस्पर्धा
कालकाजी विधानसभा सीट पर कुल 28 नामांकन पत्र दाखिल हुए हैं, और यहां आम आदमी पार्टी की वर्तमान मुख्यमंत्री आतिशी का मुकाबला भाजपा के रमेश बिधूड़ी और कांग्रेस की अलका लांबा से होगा। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है, क्योंकि इन तीनों पार्टियों के उम्मीदवारों की चुनावी ताकत समान दिख रही है। वहीं, पटपड़गंज सीट पर सत्तारूढ़ 'आप' ने अवध ओझा को उम्मीदवार बनाया है, और इस सीट पर 20 नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं। इस सीट पर मनीष सिसोदिया के चुनावी मैदान से बाहर होने के कारण, सत्तारूढ़ पार्टी को प्रतिद्वंदियों से कड़ी चुनौती मिल सकती है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का चुनावी मैदान बदलना
इस बार मनीष सिसोदिया, जो पहले पटपड़गंज सीट से चुनाव लड़ते थे, अब जंगपुरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। जंगपुरा सीट पर 12 उम्मीदवारों ने 19 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं, और इस सीट पर सिसोदिया के लिए यह एक नया चुनावी अनुभव होगा। उनका चुनावी खेल पटपड़गंज से जंगपुरा तक बदलाव का संकेत है, जहां पर कड़ी प्रतिस्पर्धा हो सकती है।
दिल्ली के विभिन्न इलाकों से नामांकन की स्थिति
दिल्ली के मध्य क्षेत्र से 99 उम्मीदवारों ने 154 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं, जबकि पूर्वी दिल्ली से 79 उम्मीदवारों ने कुल 119 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। नई दिल्ली का हिस्सा, जिसमें पटेल नगर, दिल्ली कैंट, राजेंद्र नगर, नई दिल्ली, आरके पुरम और ग्रेटर कैलाश जैसे निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं, वहां से 85 उम्मीदवारों ने कुल 135 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। उत्तरी दिल्ली से 108 उम्मीदवारों ने 183 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं, जबकि उत्तर-पूर्वी दिल्ली से 80 उम्मीदवारों ने 116 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर पश्चिमी दिल्ली से 90 उम्मीदवारों ने 139 नामांकन दाखिल किए हैं, जबकि शाहदरा क्षेत्र से 78 उम्मीदवारों ने 124 नामांकन दाखिल किए हैं।
दक्षिण दिल्ली में 57 उम्मीदवारों से कुल 88 नामांकन प्राप्त हुए हैं, वहीं दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में 93 उम्मीदवारों से 140 नामांकन प्राप्त हुए हैं। दक्षिण पश्चिमी दिल्ली में 108 उम्मीदवारों से 153 नामांकन प्राप्त हुए हैं, और पश्चिमी दिल्ली में 104 उम्मीदवारों से कुल 170 नामांकन प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली की विभिन्न सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या बहुत भिन्न है, जिससे चुनावी जंग की तीव्रता का अनुमान लगाया जा सकता है।
इंडिया गठबंधन में दरार
दिल्ली विधानसभा चुनाव के करीब आते ही इंडिया गठबंधन के भीतर दरारें दिखने लगी हैं। जहां आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं भाजपा और एनडीए गठबंधन एकजुट नजर आ रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अरविंद केजरीवाल से सवाल किया था कि उन्होंने दिल्ली में महंगाई और गरीबों की मदद के लिए क्या कदम उठाए हैं, जबकि केजरीवाल ने जवाब में कहा था कि इस चुनाव के दौरान कांग्रेस और भाजपा की "जुगलबंदी" का पर्दाफाश होगा।
2020 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा को केवल आठ सीटें मिली थीं। कांग्रेस को लगातार दो विधानसभा चुनावों में कोई भी सीट नहीं मिली। अब देखना यह होगा कि इस बार की चुनावी जंग में कौन सी पार्टी जीत हासिल करती है और किसके नेतृत्व में दिल्ली की सत्ता बदलती है।





