
बेटे के लिए सांसद पद कुर्बान करने को तैयार रीता बहुगुणा, योगेश शुक्ला ने कहा- आप बेहतर मां पर अच्छी सांसद नहीं
सांसद रीता बहुगुणा जोशी जी द्वारा अपने बेटे के टिकट के लिए इलाहाबाद की संसद सदस्यता से इस्तीफ़ा देने का प्रस्ताव अपनी पार्टी को भेजने पर इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में उनके प्रतिद्वंदी रह चुके श्री योगेश शुक्ला ने आश्चर्य और निराशा व्यक्त की है।
योगेश शुक्ला ने कहा कि "मुझे आश्चर्य होता है कि दशकों से राजनीति में रहने वाली एक प्रतिष्ठित नेता अपने पुत्र के सपनो के लिए कार्यकाल के बीच में ही इलाहाबाद के लाखों मतदाताओं के सपनों और उनके प्रति अपने दायित्वों से खुद को अलग करने की कैसे सोच सकती हैं ।"
आज ये साबित हो रहा है कि वो एक अच्छी माँ हो सकती है लेकिन एक अच्छी सांसद क़तई नहीं।
वह समझ नहीं पा रहे है कि रीता जी जनता के लिए राजनीति करती है या अपने परिवार के लिए, उन्होंने कहा "रीता जी जब २०१९ के चुनाव में आई थी तो उन्होंने इलाहाबाद की जनता से वादा किया था कि मैं अगले 5 साल तक यहां के लोगों के हर सपने को पूरा करूँगी, ऐसे में वह कैसे अपने बेटे के सपनों के लिए इलाहाबाद की जनता को बीच में छोड़ कर जा सकती है।"
शुक्ला ने कहा “रीता जी के इस प्रस्ताव से उनकी पार्टी के नेताओ पर कोई असर पड़ा हो या ना पड़ा हो, लेकिन इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र की जनता आज अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है”
इस संदर्भ में शुक्ला ने कहा कि "सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन में एक आदर्श वाक्य चलता है कि ‘व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश’ । हर राजनैतिक नेता को ये समझना चाहिए कि इस राजनैतिक वाक्य का सीधा अर्थ यह है कि जब हम कहते है कि दल से बड़ा देश, तो देश का मतलब होता है कि देश की जनता, फिर वो चाहे एक विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र, प्रादेशिक या संपूर्ण देश की जनता हो"
शुक्ला ने यह भी कहा कि "हर नेता की राजनीति का केंद्र बिंदु उस जनता का संपूर्ण कल्याण होना चाहिए जिस भौगोलिक क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व हम सांसद या विधायक होने के नाते करना चाहते हैं या करते हैं"
उन्होनें आगे कहा, लोकतंत्र की कई कड़ियां कमजोर होती जा रही हैं जो इस देश की जनता और राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, इस देश के राजनेताओं राजनीतिक दलों और जनता को मिलकर उच्च राजनैतिक आदर्शों की तरफ बढ़ना चाहिए, इसी में वर्तमान और भावी पीढ़ी का कल्याण होगा।
योगेश शुक्ला ने कहा कि "मुझे आश्चर्य होता है कि दशकों से राजनीति में रहने वाली एक प्रतिष्ठित नेता अपने पुत्र के सपनो के लिए कार्यकाल के बीच में ही इलाहाबाद के लाखों मतदाताओं के सपनों और उनके प्रति अपने दायित्वों से खुद को अलग करने की कैसे सोच सकती हैं ।"
आज ये साबित हो रहा है कि वो एक अच्छी माँ हो सकती है लेकिन एक अच्छी सांसद क़तई नहीं।
वह समझ नहीं पा रहे है कि रीता जी जनता के लिए राजनीति करती है या अपने परिवार के लिए, उन्होंने कहा "रीता जी जब २०१९ के चुनाव में आई थी तो उन्होंने इलाहाबाद की जनता से वादा किया था कि मैं अगले 5 साल तक यहां के लोगों के हर सपने को पूरा करूँगी, ऐसे में वह कैसे अपने बेटे के सपनों के लिए इलाहाबाद की जनता को बीच में छोड़ कर जा सकती है।"
शुक्ला ने कहा “रीता जी के इस प्रस्ताव से उनकी पार्टी के नेताओ पर कोई असर पड़ा हो या ना पड़ा हो, लेकिन इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र की जनता आज अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है”
इस संदर्भ में शुक्ला ने कहा कि "सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन में एक आदर्श वाक्य चलता है कि ‘व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश’ । हर राजनैतिक नेता को ये समझना चाहिए कि इस राजनैतिक वाक्य का सीधा अर्थ यह है कि जब हम कहते है कि दल से बड़ा देश, तो देश का मतलब होता है कि देश की जनता, फिर वो चाहे एक विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र, प्रादेशिक या संपूर्ण देश की जनता हो"
शुक्ला ने यह भी कहा कि "हर नेता की राजनीति का केंद्र बिंदु उस जनता का संपूर्ण कल्याण होना चाहिए जिस भौगोलिक क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व हम सांसद या विधायक होने के नाते करना चाहते हैं या करते हैं"
उन्होनें आगे कहा, लोकतंत्र की कई कड़ियां कमजोर होती जा रही हैं जो इस देश की जनता और राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, इस देश के राजनेताओं राजनीतिक दलों और जनता को मिलकर उच्च राजनैतिक आदर्शों की तरफ बढ़ना चाहिए, इसी में वर्तमान और भावी पीढ़ी का कल्याण होगा।




























































