ढाई साल बाद योगी मंत्रिमंडल का विस्तार, कुछ को मिलेगा मंत्री बनने का मौका तो कुछ की छुट्टी तय
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ढाई साल बाद योगी मंत्रिमंडल का विस्तार, कुछ को मिलेगा मंत्री बनने का मौका तो कुछ की छुट्टी तय

By Jagran calender  21-Aug-2019

ढाई साल बाद योगी मंत्रिमंडल का विस्तार, कुछ को मिलेगा मंत्री बनने का मौका तो कुछ की छुट्टी तय

करीब ढाई साल बाद योगी मंत्रिमंडल का पहला विस्तार अंतत: सुनिश्चित हो गया। बुधवार को राजभवन में 11 बजे नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। कई विधायकों को पहली बार मंत्री बनने का मौका मिलेगा, वहीं कुछ मंत्रियों की छुट्टी होनी तय है। कुछ मंत्रियों को स्वतंत्र प्रभार से कैबिनेट और राज्यमंत्री से स्वतंत्र प्रभार पर प्रोन्नति मिल सकती है।
नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के लिए राजभवन ने मंगलवार को आमंत्रण पत्र जारी कर दिया है। इसके पहले राजधानी के देवा रोड स्थित एक होटल में आरएसएस, भाजपा और सरकार के बीच समन्वय बैठक हुई। इस बैठक में शपथ दिलाने वाले विधायकों और हटाए जाने वाले मंत्रियों के नाम पर चर्चा हुई। बैठक में आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश समेत कई प्रमुख लोग बैठक में शामिल हुए। बैठक समाप्त होने के बाद फिर सभी लोग मुख्यमंत्री के पांच कालिदास मार्ग स्थित आवास पर आ गए। वहां भी कुछ नए तथ्यों पर चर्चा हुई।
बढ़ाई जा सकती है मंत्रियों की संख्या
कोटे के मुताबिक प्रदेश में 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जबकि मौजूदा समय में योगी समेत मंत्रिमंडल की कुल संख्या 43 हैं। इनमें स्वतंत्र प्रभार के नौ और 13 राज्यमंत्री हैं। संकेत मिल रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसमें संगठन को तरजीह देने के साथ क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने पर भी जोर है। एक और उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा चलती रही, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
इन विधायकों को दिलाई जा सकती शपथ
मंत्रिमंडल विस्तार में संगठन के पदाधिकारियों को भी अवसर मिलना तय माना जा रहा है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया, विद्यासागर सोनकर, नीलिमा कटियार, विजय बहादुर पाठक और पंकज सिंह व प्रदेश उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल का नाम प्रमुखता से चल रहा है। जिन विधायकों को मौका मिल सकता है उनमें सपा सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे माता प्रसाद पांडेय को पराजित करने वाले सिद्धार्थनगर जिले के इटवा क्षेत्र के विधायक सतीश द्विवेदी, आगरा से अनुसूचित जाति के कोटे में जीएस धर्मेश और पिछड़े वर्ग से उदयभान चौधरी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। अनुपमा जायसवाल के इस्तीफे के बाद वाराणसी के विधायक रवींद्र जायसवाल को शपथ दिलाए जाने की संभावना बढ़ गई है।
बरेली से बहोरन लाल मौर्य और डॉ. अरुण कुमार, बुंदेलखंड से बृजेश प्रजापति, झांसी से रवि शर्मा, बलिया जिले से आनंद शुक्ला, संजय यादव, बुलंदशहर से डॉ. अनीता राजपूत लोध व मुजफ्फरनगर से कपिलदेव अग्रवाल का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के लिए विधान परिषद की सीट छोडऩे वाले पूर्व मंत्री व एमएलसी यशवंत सिंह, अपना दल एस के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल को भी शपथ दिलाई जा सकती है। राजधानी से नीरज बोरा और मुख्यमंत्री के गृह जिले से संगीता यादव का नाम भी सुर्खियों में है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को हराने में सक्रिय दल बहादुर कोरी भी कतार में हैं।
बुलंदशहर से अनिल शर्मा, साहिबाबाद से सुनील शर्मा, फर्रुखाबाद से सुशील शाक्य व मेजर सुनील दत्त, संतकबीरनगर से श्रीराम चौहान, रालोद से भाजपा में आए सहेंद्र सिंह रमाला, गाजीपुर से संगीता बलवंत, फतेहपुर से कृष्णा पासवान, चित्रकूट से चंद्रिका उपाध्याय, ललितपुर के रामरतन कुशवाहा, औरैया के दिबियापुर के लाखन राजपूत, उन्नाव से बंबालाल दिवाकर, चरथावल से विजय कुमार कश्यप समेत कई प्रमुख नामों पर विचार किया गया है। आगरा जिले की विधायक पक्षालिका सिंह के लिए भी पैरवी हुई है। मीरजापुर के मडि़हान क्षेत्र के विधायक राम शंकर पटेल को भी मंत्री बनाया जा सकता है। इनमें किसकी किस्मत खुलेगी यह तो बुधवार को ही साफ हो पाएगा।
इनको मिल सकती है प्रोन्नति
स्वतंत्र प्रभार के मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, डॉ. महेंद्र सिंह, अनिल राजभर, सुरेश राणा, धर्म सिंह सैनी, जयप्रकाश निषाद, नीलकंठ तिवारी और उपेंद्र तिवारी को प्रोन्नति देकर कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। राज्यमंत्रियों में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह, गिरीश यादव, सुरेश पासी और जयप्रकाश निषाद को भी स्वतंत्र प्रभार का ओहदा मिल सकता है।
वित्त विभाग पर नजर
वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल और वित्त राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल के इस्तीफे के बाद अब वित्त विभाग पर नजर लग गई है। वैश्य समाज से दोनों मंत्रियों के होने की वजह से इसी समाज के विधायकों की वित्त पर नजर लगी है। अनुपमा को स्वतंत्र प्रभार के रूप में बेसिक शिक्षा विभाग भी दिया गया था।
 

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