GST संग्रह में 'बीमारू' राज्य सबसे आगे, दिल्ली और पश्चिम बंगाल पिछड़े
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GST संग्रह में 'बीमारू' राज्य सबसे आगे, दिल्ली और पश्चिम बंगाल पिछड़े

By Aajtak calender  13-Aug-2019

GST संग्रह में 'बीमारू' राज्य सबसे आगे, दिल्ली और पश्चिम बंगाल पिछड़े

इस वित्त वर्ष (2019-20) के पहले चार महीनों में गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स संग्रह के मामले में बिहार, यूपी, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे पिछड़ राज्यों ने महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है. इस दौरान देश का कुल जीएसटी संग्रह 9 फीसदी बढ़कर 3.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इस मामले में दिल्ली और पश्चिम बंगाल पिछड़ गए हैं. जबकि पूर्वोत्तर के राज्यों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है.
गौरतलब है कि बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, यूपी जैसे राज्यों को कभी 'बीमारू' (BIMARU) कहा जाता था. इन पिछड़े राज्यों में जनसंख्या काफी ज्यादा है, इसलिए तमाम वस्तुओं और सेवाओं को उपभोग भी काफी ज्यादा होता है. ओडिशा के जीएसटी संग्रह में सबसे ज्यादा 20.8 फीसदी की बढ़त हुई है. इसके बाद उत्तराखंड के जीएसटी संग्रह में 19.9 फीसदी, बिहार में 17.8 फीसदी, एमपी में 14.6 फीसदी, असम में 14.1 फीसदी और यूपी में 12 फीसदी की बढ़त हुई है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछड़े राज्यों में सिर्फ पश्चिम बंगाल ही ऐसा है जिसने इस वित्त वर्ष के अप्रैल से जुलाई के दौरान जीएसटी कलेक्शन में बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है. पश्चिम बंगाल के जीएसटी संग्रह में महज 6.4 फीसदी की बढ़त हुई है. दिल्ली को इस मामले में फिसड्डी माना जा सकता है, जिसके संग्रह में 2 फीसदी की गिरावट आई है. एक साल पहले के 13,000 करोड़ रुपये के मुकाबले इस साल चार महीने में दिल्ली का जीएसटी संग्रह महज 12,700 करोड़ रुपये रहा.
पूर्वोत्तर के राज्य सबसे आगे
जीएसटी संग्रह के मामले में पूर्वोत्तर के राज्यों ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया है. नगालैंड में जीएसटी कलेक्शन 39 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश में 35 फीसदी और सिक्किम में 32 फीसदी बढ़ा है. हालांकि आंकड़ों के हिसाब से देखें तो कुल मिलाकर इन राज्यों का कलेक्शन कुछ सौ करोड़ रुपये ही है.
पिछड़े राज्यों का प्रदर्शन बेहतर क्यों
जानकारों का कहना है कि इस बात का अंदाजा पहले से ही था कि बाद में धीरे-धीरे उन राज्यों में जीएसटी संग्रह बढ़ेगा जहां ज्यादा उपभोग होता है. हालांकि इससे सरकार को अब चिंता यह है कि उन विकसित राज्यों की भरपाई केंद्र को करनी होगी, जहां टैक्स कलेक्शन कम हो रहा है.

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