क्या संविधान में जम्मू कश्मीर की सीमा दोबारा तय करने का प्रावधान है? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
Latest News
bookmarkBOOKMARK

क्या संविधान में जम्मू कश्मीर की सीमा दोबारा तय करने का प्रावधान है? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

By Tv9bharatvarsh calender  04-Aug-2019

क्या संविधान में जम्मू कश्मीर की सीमा दोबारा तय करने का प्रावधान है? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

सरकार द्वारा अमरनाथ यात्रा बीच में रोकने और यात्रियों को लौटने को कहने के बाद जम्मू और कश्मीर पर केंद्र के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्य को तीन भागों में बांटने पर सरकार विचार कर रही है, जो इस मुद्दे से निपटने की वृहद योजना का हिस्सा है. उनका कहना है कि संविधान में ऐसे प्रावधान हैं, जिससे पाकिस्तान से लगते राज्यों की सीमारेखा में बदलाव किया जा सकता है. नाम गोपनीय रखने की शर्त पर एक संविधान विशेषज्ञ ने बताया कि संविधान में आर्टिकल 370 की वैधता के बावजूद राज्य को तीन भागों में बांटा जा सकता है. आर्टिकल 35ए के विपरीत आर्टिकल 370 संविधान का औपचारिक हिस्सा है. इस आर्टिकल को आर्टिकल 368(1) के माध्यम से संशोधित किया जा सकता है.
आर्टिकल 368 (1) के माध्यम से आर्टिकल 370 को निरस्त करने के लिए संविधान में संशोधन की मांग के लिए लोकसभा में प्रस्ताव पेश किया जा सकता है. लोकसभा और राज्यसभा को इस संशोधन को पारित करना होगा और उसके बाद देश के आधे राज्यों को भी इस फैसले पर सहमत होना होगा. यह एक लंबी प्रक्रिया है, लेकिन किया जा सकता है. आर्टिकल 370 को निरस्त करने के बाद, संसद के पास यह अधिकार होगा कि वह जम्मू और कश्मीर की सीमाओं को फिर से तय कर सके. आर्टिकल 370 से जम्मू और कश्मीर को स्वायत्त राज्य का दर्जा मिलता है, लेकिन आर्टिकल 368(1) से संसद अपने संसदीय शक्तियों का प्रयोग करते हुए इसमें अतिरिक्त संशोधन कर सकती है, या इस लेख में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संविधान के किसी प्रावधान को निरस्त कर सकती है.
संविधान में आर्टिकल 370 को माना गया है अस्थायी
विशेषज्ञ के मुताबिक, आर्टिकल 3 एक नए राज्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है या प्रभावित राज्य के विधायकों के साथ परामर्श करने के बाद राष्ट्रपति की सिफारिश पर संसद में एक विधेयक के माध्यम से सीमाओं का दोबारा निर्धारण किया जा सकता है. जम्मू और कश्मीर को स्वायत्त दर्जा होने के कारण यहां आर्टिकल 3 का प्रयोग नहीं किया जा सकता है. इस आर्टिकल के प्रयोग से ही तेलगांना जैसे नए राज्यों का गठन किया गया है. इसलिए जम्मू और कश्मीर को तीन राज्यों में बांटने के लिए पहले आर्टिकल 370 को निरस्त करना होगा.
लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप ने मीडिया को बताया था, “संविधान में आर्टिकल 370 को एक अस्थायी प्रावधान माना गया है, न कि विशेष प्रावधान. संविधान में अस्थायी, परिवर्तनकारी और विशेष प्रावधान है. इसमें सबसे कमजोर प्रावधान अस्थायी प्रावधान है. सवाल यह है कि इसे कैसे खत्म किया जा सकता है और कब खत्म किया जाएगा.” भारतीय जनता पार्टी के नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का कहना है, “आर्टिकल 370 का उप खंड 3 राष्ट्रपति को यह अधिसूचित करने की अनुमति देता है कि आर्टिकल 370 को समाप्त कर दिया गया है. इसके बाद, आर्टिकल 3 लागू हो सकता है. राष्ट्रपति विधानसभा की अनुपस्थिति में राज्यपाल से परामर्श कर सकते हैं.”

MOLITICS SURVEY

क्या आरक्षण पर मोहन भागवत के बयान से चुनावों में बीजेपी को नुकसान होगा?

TOTAL RESPONSES : 10

Raise Your Voice
Raise Your Voice 

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know