RTI में संशोधन और कमज़ोर पड़ता हमारा लोकतंत्र
Latest News
bookmarkBOOKMARK

RTI में संशोधन और कमज़ोर पड़ता हमारा लोकतंत्र

By Molitics calender  30-Jul-2019

“केंद्र सरकार मे RTI संशोधन बिल पास कर दिया है जिसके अनुसार सैलरी, भत्ते, सेवा की शर्तें और कार्यकाल केंद्र सरकार के अधीन होगा। ये संशोधन पारदरिशिता के कानून को हिला कर रख देगा। मोदी जी, ये संशोधन दर्शाता है कि आप लोकशाही की जगह तानाशाही में विश्वास करते हैं।

”सबसे पहले आपको ये बताएँ RTI है क्या? एक समय जब CBI, Election Commission और न्यायपालिका जैसे संस्थानों की स्वतंत्रता लगातार खतरे में दिख रही थी, RTI - आम लोगों के लिए सूचनाओं का बड़ा हथियार माना जा रहा था।नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा पैसे किस बैंक में जमा हुए, कॉमनवेल्थ घोटाले से लेकर कोयला घोटाला, राशन घोटाला, 2G - घोटाला आदि न जाने कितने ही घोटालों का पर्दाफ़ाश RTI ने किया।

ख़ैर सरकार ने सूचना का अधिकार संशोधन बिल पास कर दिया है। विपक्ष के आरोप हैं कि सरकार RTI को कमज़ोर करना चाहती है क्योंकि ये भ्रष्टाचारियों से मिली हुई है। सरकार ने इस बात को खारिज किया है। कहती है - सरकार सरलीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। चलिए जानते हैं कि RTI संशोधन है क्या -ओरीजिनल

RTI बिल के अनुसार -

1. मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त का कार्यकाल 5 साल का होता। और अधिकतम उम्र 65 साल की होगी। संशोधन के हिसाब से कार्यकाल के बारे में के बारे में कोई भी फैसला केंद्र सरकार की जिम्मेदारी होगी।

2.  पहले के बिल के हिसाब से सूचना आयोग के सदस्यों की सैलरी और सेवा की शर्तें चुनाव आयोग के सदस्यों के समान होती थी। लेकिन संशोधन के जरिए भत्ते और वेतन के बारे में निर्णय केंद्र सरकार ने अपने अंदर ले लिया है।सरकार ने ये दलील दी है कि चुनाव आयोग और सूचना आयोगों की कार्यप्रणालियां 'एकदम भिन्न' हैं. चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है सूचना आयोग एक कानूनी निकाय है।लेकिन सरकार यह भूल गई कि फ्री स्पीच और निष्पक्ष चुनाव संविधान के लक्ष्य हैं और चुनाव आयोग और सूचना आयोग इस लक्ष्य को पाने के लिए ज़रूरी संस्थान हैं।

2013 से 2018 तक भारत के केंद्रीय सूचना आयुक्त रह चुके प्रोफेसर श्रीधर आचार्युलू कहते हैं कि यह संशोधन सूचना आयोग को सरकार के अधीन ला देगा. उनके मुताबिक, इसके खतरनाक परिणाम होंगे.अप्रैल 1996 में राजस्थान के बियावर में कुछ लोग इकट्ठा हुए। SDM ऑफिस तक गए और आंदोलन किया। उन्होंने नारा लगाया था - हमारा पैसा - हमारा हिसाब। अंततः इसी तरह के आंदोलन का परिणाम था RTI एक्ट। सरकार के इस संशोधन से भ्रष्टचार के खिलाफ और निष्पक्षता के लिए सड़क पर हो रहे तमाम आंदोलनों को कुचल दिया है।

MOLITICS SURVEY

'ओला-ऊबर के कारण ऑटो सेक्टर में मंदी' - क्या निर्मला सीतारमण के इस बयान से आप सहमत है ?

TOTAL RESPONSES : 46

Raise Your Voice
Raise Your Voice 

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know