'लोकतंत्र को हर दिन लग रहा एक झटका'
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'लोकतंत्र को हर दिन लग रहा एक झटका'

By Aajtak calender  11-Jul-2019

'लोकतंत्र को हर दिन लग रहा एक झटका'

राज्यसभा में पी चिदंबरम ने कहा कि बजट दस्तावेज की पहुंच देश के सभी लोगों तक नहीं है और इस वजह से देश को आंकड़े पता चलने चाहिए क्योंकि उन्होंने सिर्फ टीवी पर बजट भाषण देखा है. देश की सेना, महिलाओं, मनरेगा, स्वास्थ्य के लिए क्या बजट तय हुआ है, यह देश की जनता को जानने का हक है. उन्होंने कहा कि सरकार विकास दर के अलग-अलग आंकड़े पेश करती है लेकिन इसकी सच्चाई जानने का हक जनता को है. उन्होंने कहा कि सरकार ढांचागत सुधारों की बात करती है लेकिन हर बदलाव सुधार नहीं है, कोई मामूल बदलाव भी सुधार की श्रेणी में नहीं आ सकता. सरकार से पूछता हूं कि वह बजट भाषण में एक भी ढांचागत सुधार दिखा दे. चिदंबरम ने कहा कि पिछले 20-25 साल में सिर्फ 11 बड़े ढांचागत सुधार हुए हैं.  उन्होंने कहा कि सिर्फ बोलने से ढांचागत सुधार नहीं हो जाते.
चिदंबरम ने बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि सरकार ने निवेश और निर्यात को विकास के लिए सबसे जरूरी बताया है. लेकिन आपने परिवारों की बचत के लिए इस बजट में कोई उपाय किए नहीं है और इससे मध्यम वर्ग को काफी नुकसान होने वाला है. अगर परिवारों में बचत नहीं बढ़ेगी तो घरेलू बचत को आप कैसे बढ़ाएंगे. घरेलू बचत नहीं बढ़ेगी तो घरेलू निवेश भी नहीं बढ़ेगा, ऐसे में 8 फीसदी विकास दर कहां से लाएंगे. वित्त मंत्री अगर टीचर हैं तो मैं भी स्टूडेंट की तरह उनसे यह बात समझना चाहता हूं. पिछले साल जीएसटी में 3.3 फीसदी का इजाफा हुआ था जबकि अनुमान 45 फीसदी का लगाया गया था. सरकार के ये लक्ष्य सच्चाई से बिल्कुल परे हैं लेकिन फिर भी उन्हें हासिल करने की शुभकामनाएं देता हूं. 
राज्यसभा में चिदंबरम ने कहा कि एनडीए के पहली बार सत्ता में आने के बाद लगातार अर्थव्यवस्था गिर रही है. कृषि क्षेत्र में भी गिरावट आई है और हर साल देश में 10 हजार किसान आत्महत्या कर रहे हैं, महाराष्ट्र में इस साल ही 800 खुदकुशी कर चुके हैं. कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमारी सरकार के जाने के बाद निर्यात लगातार 4 साल तक गिरा सिर्फ 2018 में निर्यात थोड़ा सा बढ़ सका है. बेरोजगार लगातार बढ़ी है और बीटेक करने वाले लाखों छात्रों को नौकरियां नहीं मिल रही हैं. सरकार के पास प्रचंड बहुमत है और हम ऐसे संख्याबल की चाहत रखते थे लेकिन हमे मिल नहीं सका. सरकार को तो ऐसे जनादेश के बाद बजट में साहसी फैसले लेने चाहिए थे.
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राज्यसभा में पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा देने की बात करती है लेकिन सरकार की योजना के तहत सिर्फ 14 लाख लोगों को अस्पताल में इसका लाभ मिला है. सरकार 40 करोड़ लोगों को पेंशन का देने वाली है लेकिन पहला पेंशन पेआउट 2039 में आएगा जबकि आज 2019 चल रहा है. सरकार 99 फीसदी गांवों में शौचालय बनाने की बात कहती है लेकिन इससे साफ करने वालों के बारे में भी सोचिए. एक सरकारी स्टडी के मुताबिक 23 फीसदी के लोगों के पास शौचालय है लेकिन इस्तेमाल नहीं हुआ जबकि प्राइवेट स्टडी के मुताबिक 43 फीसदी शौचालय न इस्तेमाल हुए हैं और न इस्तेमाल होने लायक हैं. जहां पानी नहीं हैं वहां के लोग शौचालय का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं, पीने तक और रोजमर्रा के काम के लिए भी पानी नहीं है. ग्राम सड़क योजना के तहत 97 फीसदी गांवों को कवर करने की बात सरकार कहती है लेकिन 10 साल पहले जो रोड बनी थे वह आज किसी काम की नहीं है. सरकार एक लाख करोड़ एनपीए कम होने का वादा करती है लेकिन पिछले 5 साल में 5.55 लाख करोड़ से ज्यादा रुपये सिर्फ कॉर्पोरेट के दिए हैं.
चिदंबरम ने कहा कि बजट में 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का लक्ष्य रखा गया है लेकिन मैं इससे बेहतर लक्ष्य बताने जा रहा हूं. उन्होंने कहा कि 1991 में भारत की अर्थव्यवस्था 325 बिलियन डॉलर थी जो 2003-04 में दोगुनी होकर 680 बिलियन डॉलर हो गई. इसके बाद यहां से सिर्फ 4 साल में ये दोगुना होकर 1.22 ट्रिलियन डॉलर हो गई है. इसके बाद फिर से दोगुनी होकर 2017 में 2.48 ट्रिलियन डॉलर हो गई, ये भी 5 ट्रिलियन डॉलर होगी. अगर अर्थव्यवस्था 12 फीसदी से बढ़ेगी तो 6 साल में दोगुनी हो ही जाएगी. उन्होंने कहा कि हर 6-7 साल में अर्थव्यवस्था दोगुनी होती है. 

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