गंगा में नहीं बचा डुबकी लगाने तक का पानी !!
Latest News
bookmarkBOOKMARK

गंगा में नहीं बचा डुबकी लगाने तक का पानी !!

By The Print calender  12-Jun-2019

गंगा में नहीं बचा डुबकी लगाने तक का पानी !!

अगर गंगा का दोहन यूंही जारी रहा तो आने वाले दिनों में गंगा में पानी नहीं बचेगा. आलम यह है कि कई जगह गंगा इतनी सूख चुकी है कि वहां डुबकी लगाने तक का पर्याप्त पानी नहीं बचा है. वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर व अन्य स्थानों में लगातार घटते जलस्तर को ‘न्यूनतम चेतावनी बिंदु’ की ओर जाते देख जलकल विभाग ने अलर्ट जारी किया है. उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर गंगा का जल दोहन होने से पानी का संकट गहराने की संभावना बढ़ती जा रही है. गंगा का जलस्तर दो सौ फीट रहने तक ही जल की आपूर्ति सामान्य रहती है. अभी तक गंगा का जलस्तर 192 फीट दर्ज किया गया. हालांकि यह पिछले साल जून में गंगा के जलस्तर 187 फीट से अधिक है, लेकिन इसका असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ने लगा है. यहां लगाए गए पंप पानी कम देने लगे हैं. इसे लेकर लोग चिंतिंत दिखाई दे रहे हैं.
लोग डुबकी भी नहीं लगा पा रहे 
गंगा पर 30 वर्षो से कार्य कर रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि प्रयागराज में हुए कुंभ के दौरान पर्याप्त जल मौजूद था. लेकिन गर्मी शुरू होते ही यहां जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है. यहां पानी इतना कम हो गया है कि लोग डुबकी भी नहीं लगा पा रहे हैं. बरसाती पाने न आने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है. बांधों के पानी को रोका गया है, जिससे यह संकट बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि नरौरा, टिहरी का पानी भी गंगा तक नहीं पहुंच पा रहा है. सहायक नदियां सूख गई हैं. बचा-खुचा पानी वाष्पीकरण के कारण नहीं बच पा रहा है. जब तक बांधों का पानी नहीं छोड़ा जाएगा, तब यह समस्या बनी रहेगी. प्रवाह कम होने के साथ ही शहर का सीवेज नालों के जरिए सीधे नदी में जाने से गंगा का प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है.
गंगा पर कार्य करने वाले स्वामी हरि चैतन्य ब्राम्हचारी महराज बताते हैं, ‘पश्चिमी उप्र से पानी का दोहन जरूरत से ज्यादा हो रहा है. गर्मी में ज्यादा पानी वाली कृषि करने से सारा पानी वहीं पर प्रयोग हो जाता है. यहां पर पानी पहुंच नहीं पाता है. यहां पर सीवर लाइन और टेनरी के पानी ही गंगा में पहुंचता है. कोई यह नहीं सोच रहा कि गंगा को कैसे बचाया जाए?’
उन्होंने कहा कि पहले प्रदूषण पर रोक लगाना भी बहुत जरूरी है. अगर कोई दोहन कर रहा है, तो सरकार को चाहिए कि पानी ज्यादा बढ़ाकर छोड़ दे, जिससे जीव-जंतु और पक्षीयों की जान बच सकती है.
स्वामी ने कहा कि सहायक नदियों और नालों के बल पर अपने वजूद के लिए लड़ रही हैं. इस कारण रेत के टीले उभरते जा रहे हैं. ऐसे में गंगा में पानी छोड़ने को प्रमुखता पर लिया जाना चाहिए. वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो आगे और भयावह तस्वीर सामने आ सकती है.
गंगा का जलस्तर एक हफ्ते में 2 फीट नीचे गया
विशेषज्ञों की मानें तो गंगा का जलस्तर एक सप्ताह में करीब दो फीट कम हुआ है. तीन दिनों में रोजाना दो इंच पानी घटा है. बीते तीन जून को गंगा का जलस्तर 193 फीट था जो नौ जून को 191 फीट चार इंच रह गया. सात जून को जलस्तर 191 फीट 8 इंच था.
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता आर.पी. तिवारी के अनुसार, ‘कानपुर बैराज से साढ़े तीन हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया है. इलाहाबाद होते हुए यह पानी जब बनारस पहुंचेगा तो इसकी मात्रा साढ़े चार हजार क्यूसेक से ज्यादा हो जाएगी. यमुना का पानी भी इसमें मिलने के कारण बनारस में ज्यादा मात्रा में पानी पहुंचेगा. इससे हालत में सुधार होगा. लोगों के लिए पानी का संकट भी कम हो जाएगा.’

MOLITICS SURVEY

क्या कांग्रेस का महागठबंधन से अलग रह के चुनाव लड़ने की वजह से बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला है?

हाँ
  51.35%
नहीं
  43.24%
अनिश्चित
  5.41%

TOTAL RESPONSES : 37

Raise Your Voice
Raise Your Voice 

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know