यह फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी मामले की गंभीरता से जांच करेगी और अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का आकलन करेगी। इसके अलावा, कमेटी इस घटना के कारण उत्पन्न हुए प्रभावों और उस पर की गई प्रतिक्रिया की समीक्षा करेगी। समिति का उद्देश्य केवल तथ्यों को उजागर करना नहीं बल्कि इस तरह की घटनाओं के भविष्य में पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रभावी उपायों का भी प्रस्ताव करना है। इसके लिए यह समिति पीड़िता, उसके परिवार, दोस्तों, और समाज से जुड़े विभिन्न गैर सरकारी संगठनों (NGOs) से भी बातचीत करेगी। यह संभव है कि फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी 30 दिसंबर, 2024 को चेन्नई का दौरा करेगी, जहां वह स्थानीय अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों से और जानकारी प्राप्त करेगी।
मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच को और अधिक गंभीरता से लेने के लिए तीन महिला आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। SIT इस बात की भी जांच करेगी कि FIR के लीक होने के पीछे का कारण क्या था, क्योंकि इससे पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो गई थी, जो कि उसके लिए गंभीर मानसिक और भावनात्मक आघात का कारण बना। इसके अलावा, कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को आदेश दिया है कि FIR के लीक होने के कारण पीड़िता को हुए आघात और मानसिक यातना के लिए उसे 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
यह मामला एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि कैसे जांच एजेंसियों और न्यायिक संस्थाओं को इस तरह के संवेदनशील मामलों को त्वरित और प्रभावी तरीके से निपटाना चाहिए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और समाज में इस तरह की घटनाओं के प्रति जागरूकता बढ़े।





