चेन्नई:
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (TVK प्रमुख) द्वारा राज्य की विस्तारित ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलकर दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज के नाम पर रखने का निर्णय राज्य के सियासी गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। इस कदम को महज एक कल्याणकारी योजना के नाम में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके पीछे एक सधा हुआ राजनीतिक संदेश छिपा है।
कामराज के नाम से सियासी संदेश और डीएमके पर निशाना
तमिलनाडु सरकार ने 22 सितंबर को आदेश जारी कर मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलकर ‘पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम’ कर दिया है। सितंबर 2022 में तत्कालीन डीएमके सरकार (एमके स्टालिन के कार्यकाल) द्वारा शुरू की गई इस योजना का दायरा विजय के नेतृत्व वाली सरकार के आने के बाद बढ़ाया गया। 15 जुलाई को कामराज की जयंती पर इसमें कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को शामिल किया गया था। अब इसके साथ के. कामराज का नाम जोड़कर मुख्यमंत्री विजय ने एक तरफ जहां डीएमके पर वैचारिक और राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश की है, वहीं दक्षिणी तमिलनाडु में मजबूत प्रभाव रखने वाले नादर समुदाय को भी साधने का स्पष्ट संदेश दिया है।
नादर समुदाय और क्षेत्रीय समीकरणों पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन, तेनकासी और विरुधुनगर जैसे दक्षिणी जिलों में नादर समुदाय की अच्छी मौजूदगी है। राज्य के कुल मतदाताओं में इस समुदाय की हिस्सेदारी करीब 6 से 8 फीसदी मानी जाती है। विजय खुद ईसाई हैं और ईसाई नादर समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जबकि के. कामराज का नाम हिंदू नादरों तक पहुंच बनाने के लिए एक राजनीतिक सेतु के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके जरिए विजय द्रविड़ दलों के पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर अपनी पार्टी की पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
भाजपा की नजर में 2029 का बड़ा अवसर
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों और भाजपा खेमे में इस कदम को एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों और मोदी समर्थकों का मानना है कि के. कामराज को केवल तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित रखने के बजाय एक व्यापक OBC प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकता है। इसी संभावना को देखते हुए भाजपा समर्थक समूह 'टीम आरडी मोदीजी फॉर 2029' के प्रमुख रविंद्रन दुरईसामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि केंद्र सरकार की किसी प्रमुख योजना का नाम भी कामराज के नाम पर रखा जाए, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में एक नया समीकरण साधा जा सके।
द्रविड़ राजनीति के खिलाफ नया विकल्प
विजय ने अपनी पार्टी की स्थापना के समय से ही पेरियार, कामराज, बीआर आंबेडकर, रानी वेलु नचियार और अंजलाई अम्मल जैसे पांच प्रमुख नामों को अपनी राजनीतिक प्रेरणा के रूप में पेश किया है। कामराज को सामने लाकर विजय यह संदेश दे रहे हैं कि तमिलनाडु की राजनीतिक विरासत सिर्फ द्रविड़ आंदोलन तक सीमित नहीं है। जानकारों का मानना है कि विजय 'एंटी-द्रविड़ियन' राजनीतिक लाइन पर काम कर रहे हैं और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदलने की जुगत में हैं।





