Jammu:
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ (Kishtwar) जिले के सुदूर गांव मुंगली (वारवान) में देर रात भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में कम से कम आठ रिहाइशी मकान और कई मवेशी शेड (cowsheds) जलकर पूरी तरह राख हो गए। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि (मानवीय क्षति) नहीं हुई है।
देर रात हुआ हादसा, कोकेरनाग से मंगानी पड़ी फायर ब्रिगेड
अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की प्रक्रिया और राहत कार्य से जुड़ी मुख्य बातें:
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आधी रात के बाद लगी आग: वारवान के मुंगली गांव में एक घर में अचानक आग भड़की और देखते ही देखते आसपास के लकड़ी के मकानों में फैल गई।
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स्थानीय लोगों का प्रयास: ग्रामीणों ने अर्थ मूवर्स (JCB) से प्रभावित घरों के कुछ हिस्सों को तोड़कर आग को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की।
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दूसरे जिले से बुलाई गाड़ियाँ: वारवान में फायर स्टेशन न होने के कारण दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग (कोकेरनाग) से दमकल गाड़ियां बुलानी पड़ीं। सुबह करीब 4 बजे आग पर काबू पाया जा सका।
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मवेशियों का नुकसान: इस हादसे में कुछ मवेशी भी जिंदा जल गए, हालांकि रात के अंधेरे के कारण नुकसान का सटीक आंकड़ा अभी साफ नहीं हो सका है।
सर्दियों में सूखे घास का भंडारण बना बड़ा खतरा
वारवान जैसे बर्फीले क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम में मवेशियों के लिए सूखा चारा और घास (dry fodder) जमा करके रखने की परंपरा है।
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एडवाइजरी जारी: प्रशासन और स्थानीय संस्थानों के जरिए ग्रामीणों को बार-बार चेतावनी दी जाती है कि वे रिहाइशी मकानों के अंदर या उनके बिल्कुल पास सूखी घास न रखें, क्योंकि इससे आग तेजी से फैलती है।
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राहत कार्य शुरू: किश्तवाड़ जिला मुख्यालय से प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री की गाड़ी भेजी जा रही है और नुकसान का आकलन जारी है।





