हरियाणा के IPS वाई पुरन कुमार की संदिग्ध आत्महत्या
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पुरन कुमार, जो राज्य पुलिस में अतिरिक्त महानिदेशक (ADGP) पद पर कार्यरत थे। सोमवार की सुबह अपने चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास में मृत पाए गए है । पुलिस के अनुसार, उन्होंने अपने ही गनमैन की सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मारी है। घटना को आत्महत्या के रूप में दर्ज किया गया है, लेकिन शुरुआती तथ्यों ने इसे एक गंभीर प्रशासनिक और संस्थागत सवाल में बदल दिया है।
घटना सुबह के समय हुई जब पुरन कुमार अपने घर के बेसमेंट कमरे में थे। यह कमरा साउंडप्रूफ था, इसलिए गोली चलने की आवाज़ आसपास किसी को सुनाई नहीं दी। जब सुरक्षाकर्मी अंदर पहुँचे, तो वे मृत अवस्था में पाए गए वही पुलिस को मौके से एक 9-पन्नों का नोट और एक दस्तावेज़नुमा वसीयत भी मिली है। दोनों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
हालांकि सीनियर IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की पत्नी पोस्टमॉर्टम के लिए राज़ी नहीं हुई है , फिलहाल अफसर का शव चंडीगढ़ के सेक्टर-16 स्थित गवर्नमेंट अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा गया है। जबकि विदेश दौरे से लौटने के बाद अवनित कुमार चंडीगढ़ में अपने सरकारी ऑफिस पहुंची और हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी समेत कई बड़े IAS और IPS अधिकारियों से मुलाकात की।
दैनिक भास्कर के मुताबिक मीटिंग में पति की सुसाइड से IAS अमनीत बहुत गुस्से में नजर आईं। मीटिंग में मौजूद अधिकारियों ने पूरन का दूसरे अधिकारियों से विवाद के बारे में पता न होने की सफाई दी है। एक सीनियर अधिकारी ने यहां तक कहा कि मैं सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं हूँ , इसलिए कुछ पता ही नहीं चला। इस पर IAS अमनीत ने दोटूक कह दिया कि इस मामले में सुसाइड नोट में जिन्हें भी जिम्मेदार ठहराया गया है, उनके खिलाफ कार्रवाई कराएंगी। ऐसे में चर्चा है कि परिवार पोस्टमॉर्टम या अंतिम संस्कार से पहले CBI जांच की मांग उठा सकता है।
वहीं सीनियर अधिकारियों से मुलाकात के बाद IAS अमनीत कुमार उस कोठी में गई, जहां पति पूरन कुमार ने सुसाइड किया था। वह काफी देर तक बेसमेंट में रहीं। यहीं कल यानि 7 अक्टूबर को उनके IPS पति ने खुद को गोली मारी थी। इसके बाद उन्होंने सेक्टर 16 के अस्पताल जाकर पति के दर्शन भी किए।
2001 बैच के आईपीएस अधिकारी, वाई पुरन कुमार हरियाणा पुलिस में अपनी सख्त छवि और सिस्टम पर सवाल उठाने वाले रवैये के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने करियर में कई बार प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विभागीय असमानताओं पर खुलकर लिखा और बोला है। हाल के महीनों में उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जातीय भेदभाव, सरकारी वाहनों के अनुचित आवंटन और पदोन्नति नियमों के उल्लंघन पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
यह घटना 7 अक्टूबर की सुबह उनके चंडीगढ़ सेक्टर-28 स्थित सरकारी आवास पर हुई। उसी दिन दोपहर को पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी किया कि ADGP वाई पुरन कुमार ने आत्महत्या की है। मौके से रिवॉल्वर, गोलियाँ और नोट जब्त कर लिए गए। CFSL (सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम ने घटनास्थल से सभी साक्ष्य जुटाए रही है।
पुलिस के अनुसार, नोट में मानसिक दबाव, काम का बोझ और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की बात लिखी गई है। NDTV और Indian Express की रिपोर्टों के मुताबिक, पुरन कुमार ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रणालीगत भेदभाव और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। हाल ही में उन पर एक मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत नाम दर्ज किया गया, जिसके बाद वे काफी तनाव में थे।
परिवार के सदस्यों और करीबी साथियों का कहना है कि उन्हें उस FIR में बिना राज्य सरकार की अनुमति के शामिल किया गया था जो IPS नियमों का उल्लंघन है। यह वही FIR थी जिसमें उनके पूर्व सहयोगी, हैडल कॉन्स्टेबल सुशील कुमार, पर रु 2.5 लाख मासिक रिश्वत मांगने का आरोप था। रोहतक के एसपी के मुताबिक, गिरफ्तार सुशील ने बयान दिया था कि वह राशि पुरन कुमार के नाम पर मांग रहा था। लेकिन, पुलिस के अनुसार वाई पुरन कुमार से कभी पूछताछ नहीं की गई थी।
प्राथमिक जांच बताती है कि पुरन कुमार ने सुबह अपने गनमैन से कहा कि उन्हें थोड़ी देर अकेले काम करना है, और रिवॉल्वर मांगी। कुछ ही मिनटों बाद गोली चलने की आवाज़ नहीं आई क्योंकि कमरा साउंडप्रूफ था। जब सुरक्षाकर्मी लौटे तो दरवाज़ा अंदर से बंद था। दरवाज़ा तोड़ा गया और शव बरामद हुआ। रिवॉल्वर पास ही पड़ी थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट फिलहाल लंबित है।जबकि पुलिस ने फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए हथियार और नोट दोनों को सील किया गया है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार ने कहा है कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं हो सकती यह उस सिस्टम की विफलता है जो सच्चाई बोलने वालों को अकेला छोड़ देता है। वहीं इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पुरन कुमार को “विवादास्पद ट्रांसफर” के बाद भी उन्होंने अपने पुराने स्टाफ को साथ रखा था, जिनमें सुशील कुमार भी शामिल थे। यह प्रशासनिक नियमों के खिलाफ था, लेकिन सूत्रों के अनुसार, वे उस पर भरोसा करते थे। अब वही व्यक्ति रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार है।
यही वह कड़ी है जिससे मामला और उलझ गया। पुलिस का कहना है कि FIR में नाम जोड़ने की प्रक्रिया सिर्फ गवाही और परिस्थितिजन्य बयान” पर आधारित थी, जबकि परिजनों का कहना है कि यह जानबूझकर किया गया प्रशासनिक दबाव” था।
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