सभापति का तर्क
सोमवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने प्रश्नकाल के दौरान उनकी बारी आने पर उन्हें श्रीमती जया अमिताभ बच्चन कहकर संबोधित किया। इसपर राज्यसभा सांसद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आपको अमिताभ का मतलब पता है? उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी शादी और अपने पति की उपलब्धियों पर बड़ा गर्व है। इसपर धनखड़ ने जवाब देते हुए कहा कि माननीय सदस्य, जो नाम इलेक्शन सर्टिफिकेट में आता है और जो सदन में जमा किया जाता है, अगर उससे आपत्ति है तो उसके अंदर बदलाव किया जा सकता है, जिसका फ़ायदा कोई भी उठा सकता है। धनखड़ ने कहा कि उन्होंने ख़ुद साल 1989 में इस प्रक्रिया का लाभ उठाया था।
सभापति की बात से असहमति जताते हुए जया बच्चन ने कहा कि वे ऐसा नहीं करने वाली है। उन्हें अपने नाम और अपने पति के नाम पर बहुत गर्व है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पति की उपलब्धियों पर भी काफी गर्व है। जया ने अमिताभ के नाम का अर्थ बताते हुए कहा कि उनके नाम का मतलब है 'ऐसी आभा जो मिट नहीं सकती' और उन्हें इसकी बहुत खुशी है।
धनखड़ ने बिना समय गंवाए जया से कहा कि वह केंद्रीय मंत्री खट्टर से अपना सवाल कर सकती है। जया ने खट्टर की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि मंत्री के नाम के साथ इनकी पत्नी का नाम भी लगा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें नाम से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन कुछ समय से सदन में महिलाओं के नाम के साथ उनके पतियों का भी नाम जोड़ा जा रहा हैं जोकि बिल्कुल गलत है। खट्टर ने जवाब में कहा कि इस जन्म में संभव नहीं है। खट्टर ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह शादीशुदा नहीं है।
नाम को लेकर जया बच्चन और उपसभापति की बहस
29 जुलाई को उपसभापति हरिवंश ने जब जया बच्चन को जया अमिताभ बच्चन बुलाया तो वह नाराज हो गई थीं। उन्होंने उपसभापति पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि अगर सिर्फ जया बच्चन बोला जाता तो वह काफी था। इसपर हरिवंश ने कहा कि उनके पटल पर पूरा नाम लिखा हुआ था, इसलिए उन्होंने पूरा नाम लिया। एक छोटी बहस के बाद फिर मामला शांत हो गया था।





